
साहिबाबाद, १३ मार्च ।
आतंकियों ने भारत में अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए तरीके में बदलाव किया है। अब वह भारत में डिजिटल स्लिपर सेल मॉड्यूल को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके माध्यम से वह मदद से मुस्लिम युवाओं को गुमराह कर उनमें जिहादी सोच विकसित कर उनका ब्रेनवाश कर रहे हैं। पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद भारत में तेजी से पैर पसार रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि जैश ने अपने इस मकसद के लिए बैन हो चुके संगठन पीएफआई (पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) व सिमी के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है। सूत्रों का दावा है कि प्रतिबंध लगने के बाद से इस संगठन के सदस्य औपचारिक रूप से सक्रिय नहीं है लेकिन स्लिपर सेल मॉड्यूल के रूप में काम कर रहे हैं। नवंबर माह में दिल्ली में हुए आतंकी हमले में भी पीएफआई द्वारा जैश की मदद का अंदेशा खुफिया एजेंसियों ने जताया था और इसकी जांच अभी भी चल रही है। मसूरी के नाहल में देश विरोधी गतिविधियों में पकड़े गए आरोपित भी इसी मुहिम का हिस्सा थे।वह जैश-ए-मोहम्मद व अक्षरधाम आतंकी हमले के मुख्य आरोपित फरातुल्ला घोरी समेत अन्य पाकिस्तानी आतंकी व कट्टरपंथी ग्रुप को भी फालो कर रहे थे। आरोपितों के पकड़े जाने के बाद कई एजेंसियां जांच में जुटी हैं। माना जा रहा है कि जांच के बाद देश भर में एक बड़े नेटवर्क व बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो सकता है।27 मई को लोनी में मजहबी कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाने वाले यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमला भी पाकिस्तानी यूट्यूबर के उकसावे मे आकर किया गया था, ऐसा अंदेशा जताया गया है। मुठभेड़ में मारे गए हमलावर जीशान व गुलफाम टेलीग्राम ग्रुप मुस्लिम आर्मी मेहदी माडरेटर से जुड़े थे और पाकिस्तानी यूट्यूबर मोहम्मद हमाद बरकाती की वीडियो देखते थे।
आरोपित जीशान ने इंस्टाग्राम पर इंस्पायर विद जीशान के नाम से अकाउंट बनाया था और इसमें उसने खुद को इस्लामिक स्पीकर बताता था, यह ग्रुप कट्टरता के संदेशों से भरा था। उसके अकाउंट से भी काफी लोग जुड़े थे और उसके वीडियो देखते थे। यूट्यूबर मोहम्मद हमाद ने गाजियाबाद के पांच हिंदूवादी नेताओं की गर्दन उड़ाने की अपील की थी। माना जा रहा है कि इसके बाद से ही आरोपित हिंदूवादी नेताओं की हत्या की साजिश रच रहे थे और जल्द ही इस साजिश को अंजाम देने वाले थे। पीएफआई का स्लिपर मॉड्यूल एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में फैला हुआ है। अब तेजी से इसे डिजिटल का रूप दिया जा रहा है। इसके बारे में लगातार जानकारी सामने आने के बाद खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। बैन हुए संगठन के लोग अंडरग्राउंड हैं और भूमिगत होकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। नाहल से दबोचे गए आरोपितों ने इंस्टाग्राम पर कई कट्टरपंथी व जिहादी विचारधारा वाले ग्रुपों को फोलो किया हुआ है। आरोपितों ने वॉट्सएप पर भी एक ग्रुप बनाया था, जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के 100 से अधिक युवा जुड़े हुए हैं।इस ग्रुप के माध्यम से वह युवाओं को भडक़ा रहे थे और उनका ब्रेनवाश कर रहे थे। ग्रुपों पर भडक़ाऊ संदेश व वीडियो के माध्यम से उन्हें उकसाया जा रहा था। यह नेटवर्क धीरे-धीरे विस्तार कर रहा था। पकड़े गए आरोपितों की साजिश नफरत की आग भडक़ाने की थी। आरोपितों की सूची में ऐसे कई हिंदूवादी नेता निशाने पर थे जिनकी वह हत्या करना चाहते थे। वह उनका सिर तन से जुदा करने की फिराक में थे। आरोपितों ने ऐसे नेताओं की सूची तैयार की थी, जिनका समाज में वजूद और लोग उनके अनुयायी हैं। इनकी हत्या के पीछे उनकी साजिश मजहबी हिंसा को भडक़ाना व हिदू-मुस्लिम भाईचारे को नुकसान पहुंचाना था। गाजियाबाद के एक बड़े हिंदूवादी नेता व धार्मिक गुरु व लोगों में अपना प्रभाव रखने वाले व्यक्ति उनके प्रमुखता से निशाने पर थे। इनकी हत्या के माध्यम से वह धार्मिक सोहार्द को बड़ी चोट पहुंचाना चाहते थे। कट्टरपंथी संगठनों ने लवजिहाद, मतांतरण के बाद अब युवाओं का ब्रेनवाश करने के लिए नया पैटर्न अपनाया है। अब संगठन सोशल मीडिया के माध्यम से अपने गतिविधियों व नेटवर्क को बढ़ा रहे हैं और जिहादी सोच, आतंकी साजिश के लिए युवाओं को भटकाने का काम कर रहे हैं। मसूरी में पूर्व में भी हिंदूवादी नेताओं व संतों पर सिर तन से जुदा करने का प्रयास हो चुका है। दो जून 2021 को डासना देवी मंदिर में विपुल विजयवर्गीय उर्फ रमजान व कासिफ हिंदू बनकर जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर महंत यति नरसिंहानंद गिरि पर हमला करने के लिए घुसे थे। लेकिन उन्हें सेवादारों ने पकड़ लिया था। इनके पास से सर्जिकल ब्लेड, दवाएं व किताबें बरामद हुई थीं। पता चला था कि यह अपने गुरु विजयनगर निवासी सलीमुद्दीन के इशारे पर मंदिर पहुंचे थे। बाद में एजेंसियों ने जांच की तो देशभर में एक हजार से अधिक लोगों के मतांतरण का पर्दाफाश हुआ था। डासना देवी मंदिर में ही 10 अगस्त 2021 को दिल्ली जंतर-मंतर पर हिंदू सम्मेलन में शामिल होने के लिए बिहार से आए साधु नरेशानंद की गर्दन काटी गई थी।उनका सिर तन से जुदा करने का प्रयास किया गया। उनपर हमला भी यति नरसिंहानंद समझकर किया गया था, लेकिन समय से उपचार मिलने के कारण उनकी जान बच गई थी। इसके बाद वर्ष 2022 में डासना के इकला स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में रुके जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर एवं हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रबोधानंद महाराज पर हमले का प्रयास किया गया। समीर शर्मा बनकर घुसा आस मोहम्मद, सर्जिकल ब्लेड, पिस्टल के साथ गिरफ्तार हुआ। उसने स्वीकार किया था कि उसे प्रबोधानंद की गर्दन उड़ानी थी। बाद में लव जिहाद का पर्दाफाश हुआ था, उसने कई युवतियों को शिकार बनाया था।




















