नई दिल्ली। थाईलैंड में प्रधानमंत्री की बर्खास्तगी के बाद सियासी संकट नजर आने लगा है। सत्ता में आने के एक साल बाद दी प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को नैतिकता के उल्लंघन के आरोप में अदालत ने बर्खास्त कर दिया, जिसके बाद देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और भी अनिश्चितता के दौर में फंस गई है। अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर थाईलैंड में आगे क्या होगा? फिलहाल पैतोंगटार्न शिनावात्रा की बर्खास्तगी के बाद उप-प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया है। वे तब तक सरकार की देखरेख करेंगे जब तक कि संसद नए प्रधानमंत्री का चयन नहीं कर लेती।

खरीद-फरोख्त की बड़ी संभावना

कोर्ट के इस फैसले से राजनीतिक दलों और अन्य सत्ता-दलालों के बीच सौदेबाजी और खरीद-फरोख्त का रास्ता खुल गया है, जिसका मुख्य किरदार निश्चित रूप से पैतोंगटार्न के प्रभावशाली पिता और पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा होंगे, जो उनकी फ्यू थाई पार्टी के अरबपति संस्थापक हैं।

दांव बहुत ऊंचा है, क्योंकि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास केवल सात सीटों का मामूली बहुमत है, जिसका अर्थ है कि गठबंधन से अलग हटकर कोई भी निष्ठा फ्यू थाई और शिनावात्रा राजनीतिक वंश के लिए महंगी पड़ सकती है।

प्रधानमंत्री पद की रेस में कौन-कौन?

2023 के चुनाव पहले घोषित उम्मीदवारों में से अब पांच उम्मीदवार शेष हैं, जो पीएम पद के लिए दावेदारी ठोंक सकते हैं। फ्यू थाई में शुरुआत में तीन उम्मीदवार थे, लेकिन अब केवल एक ही उम्मीदवार बचा है, 77 साल के चाइकासेम नीतिसिरी, जो पूर्व न्याय मंत्री और अटॉर्नी जनरल हैं और अब तक कम ही चर्चा में रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा है कि वे आगे आने के लिए तैयार हैं।