होली पर शराब मिलेगी या नहीं, असमंजस में हैं शौकीन

कोरबा। मार्च के शुरुआती दिनों में होलिका दहन और रंगोत्सव संपन्न होगा। नाम के लिए इसे उत्साह और उमंग का त्योहार कहा जाता है लेकिन स्थिति ऐसी नजर नहीं आती। इसके ठीक उल्टे अब इस तरह का ऐलान सरकार की ओर से किया गया है कि होली पर भी शराब दुकानें खुली रहेगी। हालांकि अंतिम निर्णय कलेक्टर के विवेक पर होगा। कोरबा जिले में होली पर शराब की सुविधा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए शराब के शौकीन असमंजस में हैं कि होली पर वे कैसी व्यवस्था करें।
कोरबा जिले में कोविड कालखंड के दौरान होली से ठीक पहले एक ही दिन में पांच करोड़ की रिकार्ड शराब बिक्री हुई थी और इसने प्रदेश में पहला नंबर बनाया था। इसकी चर्चा काफी दूर तक हुई थी और अलग-अलग प्रकार की प्रतिक्रियाएं आई थी। उसके बाद से कोरबा जिले में आबकारी राजस्व के लक्ष्य लगातार बढ़ते गए। हैरानी इस बात की है कि महंगाई से लेकर तमाम तरह के रोने-धोने जैसे पाखंड के बीच शराब और बीयर की बिक्री से राजस्व कुछ ज्यादा ही प्राप्त हो रहा है। यह बात और है कि जिस अनुपात में शराब की दुकानें संचालित हो रही है उससे कहीं ज्यादा अवैध शराब निर्माण और विपणन का काम भी जोरों पर है। इधर सरकार ने हाल में ही घोषणा की है कि अब होली पर भी विभिन्न क्षेत्रों में शराब की दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुली रहेंगी और इसके माध्यम से उस वर्ग के शौक को पूरा किया जाएगा जिसके साथ चोली-दामन का साथ है। होली के लिए अब 10 दिन का समय बाकी है और इंतजार किया जा रहा है कि कोरबा जिले में शराब बिक्री को लेकर स्थिति स्पष्ट हो। खबर है कि संबंधित सर्कुलर के संबंध में अभी कोई निर्णय यहां से नहीं हुआ है। आबकारी अधिकारी बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं कि दुकानों को खोलना है या बंद रखना है। जबकि राजीव गांधी इंडोर स्टेडियम में एक दिन पहले आयोजित श्रमिक सम्मेलन में आबकारी मामलों की मंत्री की ओर से कहा गया कि कोरबा या अन्य जिले में होली पर शराब की बिक्री करने का फैसला आबकारी नहीं बल्कि कलेक्टर लेंगे।
शराब दुकानों की स्थिति होली पर क्या रहेगी, इसे लेकर विभिन्न क्षेत्रों से व्यवस्था के साथ कदमताल कर रहा वर्ग मीडिया के संपर्क में है। वह यह जानने की कोशिश में है कि होलिका दहन और रंगोत्सव पर हमारी दुकानें खुली रहेगी या नहीं। उनका पूछना इसलिए स्वाभाविक है क्योंकि अगर अनुकूलता रहेगी तो वे चिंतित नहीं रहेंगे। जबकि अन्य स्थिति में उन्हें एडवांस में अपने कोटा को पूरा करना होगा और इसके लिए अग्रिम रूप से बजट की व्यवस्था भी करनी होगी।

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