सील किए गए मशीन से ही माफिया करने लगे रेत उत्खनन

जांजगीर चांपा। रेत माफिया जिले के दो बड़ी नदियों की सीना छलनी करने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पहली तो हसदेव नदी और दूसरी महानदी। इन दोनों नदिवा रेत माफियाओं के लिए पैसों के पेड़ बन चुका है। हद तो तब जिस मशीन को सील किया उस मशीन के सील को तोडक़र फिर से अवैध उत्खनन करने में लगे हुए हैं। जिला प्रशासन एवं अमला अवैध रेत प्रशासन एवं तानिज पानी नाकाम है। रेत माफिया इस कदर हावी हैं कि जो जहा कारवाई हो रही है वहां यदि मशीन को जब्त कर रहे हैं उस मशीन को ही उठाकर अन्यन्त्र रेत उत्खनन करने लगे हैं। इतना ही नहीं अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई के लिए खनिज विभाग का कहना है कि हमारे पर पर्याप्त कर्मचारी नहीं है। जिससे हम मौके पर जाकर कार्रवाई कर सकें। यही वजह है कि रेत माफिया हावी है। कहने को सरकारी रेकार्ड में मात्र पांच रेत घाटों को विधिवत अनुमति है, लेकिन दर्जनों रेत घाट आबाद है। विडंबना यह है कि जिन रेत घाटों को अनुमति मिली है उसमें भी नियम कायदों को दरकिनार कर रेत निकाली जा रही है। जहा चेन माउंटेन मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाना है वहां धड़ल्ले से चेन माउंटेन मशीन का इस्तेमाल हो रहा है। इसके चलते नदियां छलनी हो रही है। नदियों का आकार समुद्र की तरह गड्ढे होते जा रहे हैं। इससे कभी भी रेत घाटों में लोगों की डूबने से मौत हो सकती है। इससे जिला प्रशासन को कोई सरोकार नहीं है। खनिज अफसरों की माने तो उके पास कर्मचारियों की कमी बरकरार है। जहां एक पोस्ट सहायक खनिज अधिकारी का पद रिक्त है तो दूसरी ओर खनिज इंस्पेक्टरों का वो पद रिक्त है। इसी तरह अन्य कर्मचारियों का भी पद रिक्त है। यदि विभाग में पर्याप्त कर्मचारी होते तो निश्चित ही अवैध उत्खनन पर रोक लगा पाते। कर्मचारी कम होने की वजह से मैदानी स्तर पर छापेमारी नहीं की जा सकती, नतीजा अवैध उत्खनन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है।
इन दो नदियों में रेत माफिया हावी
जिले की सीमा से हसदेव नदी व महानदी गुजरी है। जहां दर्जनों रेत घाट है। इनमें जांजगीर-चांपा जिले में पांच रेत घाटों को लाइसेंस धारी हैं तो वहीं सक्ती जिले में चार लाइसेंस धारी है। बाकी दोनों नदियों में दर्जनों रेत घाट अवैध रूप से निर्बाध ढंग से संचालित हो रही है। जिले की रेत दीगर जिले में खपाया जा रहा है। एक एक रेत माफिया हर रोज लाखों का कारोबार कर रहे हैं। इन सभी रेत माफियाओं को खनिज विभाग से मौन स्वीकृति मिली हुई है। यही वजह है कि इन पर लगाम लगा पाने खनिज अफसर बेबस साबित हो रहे हैं।
बीते दिनों बम्हनीडीह इलाके के लोगों ने लामबंद होकर कलेक्टर से इस आशय की शिकायत की थी, लेकिन शिकायत पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। बताया जा रहा है कि इस इलाके के हसदेव नदी में खुलेआम बड़ी तादात में अवैध तरीके से रेत उत्खनन किया जा रहा है। जिस पर लगाम लगा पाने खनिज अमला नाकाम है। बताया जा रहा है कि खनन माफिया सीधे रायपुर से मंत्रियों से मौखिक अनुमति लेकर यहां खुलेआम रेत का उत्खनन करते हैं।
जिले के अवैध रेत घाटों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद भी वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। शिकायत पर तत्काल हमारी टीम द्वारा छापेमारी की जाती है।
हेलेंद्र स्वर्णपाल, जिला खनिज अधिकारी

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