
चंडीगढ़। हरियाणा के वि
िभन्न सरकारी विभागों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में मुख्य आरोपी माने जा रहे चंडीगढ़ के व्यवसायी और कथित बिचौलिये विक्रम वाधवा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से फरार चल रहे वाधवा की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। चंडीगढ़ पुलिस ने वाधवा के नाम पर पंजीकृत एक रेंज रोवर लग्जरी गाड़ी भी जब्त की है। पुलिस अब इस वाहन और हरियाणा में सामने आए बैंक घोटाले के बीच संभावित कड़ी की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार वाधवा से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। एजेंसी ने वाधवा के खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया हुआ था, ताकि वह देश छोडक़र फरार न हो सके। इस मामले में अब तक छह अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। 52 वर्षीय विक्रम वाधवा का सफर काफी हैरान करने वाला रहा है। पंजाब के मलोट का रहने वाला वाधवा कभी चंडीगढ़ में अपने रिश्तेदार के गेस्ट हाउस में करीब डेढ़ हजार रुपये मासिक वेतन पर केयरटेकर के रूप में काम करता था। जांच में सामने आया है कि बाद में उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदली और उसने शहर में करोड़ों रुपये की संपत्तियां खड़ी कर लीं। बताया जा रहा है कि उसके पास सेक्टर-33 में दो कनाल का मकान सेक्टर-21 और सेक्टर-36 में एक-एक कनाल के मकान हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा उसने न्यू चंडीगढ़ में करीब 210 करोड़ रुपये का फार्म हाउस भी खरीदा बताया जा रहा है। ऐसे सामने आया घोटाले का तरीका प्रारंभिक जांच के अनुसार वाधवा ने कुछ सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों से कथित सांठगांठ कर सरकारी विभागों की बड़ी रकम को निजी बैंक में सावधि जमा के रूप में रखने की व्यवस्था करवाई। आरोप है कि बाद में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से यह राशि फर्जी कंपनियों के खातों में स्थानांतरित कर दी गई। पुलिस और एसीबी अधिकारियों का कहना है कि वाधवा की गिरफ्तारी के बाद अब इस घोटाले के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है। फिलहाल पुलिस वाधवा से पूछताछ कर रही है और उसकी संपत्तियों, बैंक खातों तथा सहयोगियों की जांच तेज कर दी गई है




















