
डॉ हेमा के प्रयास से मिली सफलता
कोरबा। निर्धारित समय से पहले जन्मे एक कुपोषित बच्चे के साथ समस्या यह भी थी कि उसके दिल में छेद था। बैक इको से इसकी जानकारी हुई। कोरबा के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 40 दिन तक बेहतर उपचार और जांच के साथ इस बच्चे को सामान्य स्थिति में लाया गया है और अब उसकी छुट्टी की जा रही है। बच्चों के परिजन इस व्यवस्था से काफी खुश नजर आए।
कोरबा जिले के लौटनापारा हरदीबाजार की रहने वाली रश्मि कुर्रे ने जुलाई महीने में बचचे को जन्म दिया था। समय से पहले हुए प्रसव के कारण कुछ दिक्कत थी। बच्चों का वजन भी कम था और उसके दिल में छेद होने की जानकारी मिली। रश्मि ने बताएगी ऐसी स्थिति में परिजनों का डरना स्वाभाविक था।
रश्मि ने बताया कि बच्चों को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां पर उसकी बेहतर चिकित्सा हुई और पोषण पर ध्यान दिया गया। अच्छी बात यह है कि नवजात स्वस्थ हो गया है और उसकी समस्या दूर हो गई है। इस मामले में विशेष प्रयास करने वाली मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर हेमा नामदेव ने बताया कि रश्मि का प्रसव घर पर हुआ था और उसके बाद उसे पास के अस्पताल ले जाया गया। नवजात की स्थिति नाजुक थी और उसका वजन केवल 890 ग्राम का था। डॉ हेमा नामदेव ने बताया कि नवजात कुपोषित था और जब बैक इको से जांच की गई तो उसके दिल में छेद होने की जानकारी मिली। 40 दिन तक उपचार देने के साथ बच्चों को ठीक कर लिया गया है। उसके परिजन हर्षित है।याद रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में कोरबा को मेडिकल कॉलेज कि सुविधा दी गई। उसके बाद से लगातार मेडिकल स्टाफ की भर्ती के साथ संसाधनों में बढ़ोतरी की जा रही है कोरबा जिले के सांसद आसपास के कई जिलों के मरीजों को यहां से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो रही है।