
आगरा [एजेंसी]।कॉरपोरेट सोशल रिस्पोंसिबिलिटी (सीएसआर) फंड का उपयोग समाज सेवा के कार्यों में करने के बजाय शेल कंपनियों के माध्यम से विदेश भेजकर हीरों की तस्करी कराई गई। इन हीरों की बिक्री कर हवाला कारोबार के माध्यम से पैसा वापस कंपनियों को भेजा गया। आयकर विभाग की सर्च में इस खेल में शामिल 170 शेल कंपनियां पकड़ी गई हैं।विभागीय अधिकारी 20 हजार करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग पकडऩे का दावा कर रहे हैं। यह रकम सीएसआर के साथ ही व्यापार की भी मानी जा रही है। विभाग, अब इसके स्रोतों की विस्तृत जांच करेगा। विभाग को देश की बड़ी कंपनियों के सीएसआर फंड के करोड़ों रुपये मथुरा के जनजागृति सेवा संस्थान, अहमदाबाद के रागिनी बेन विधिक चंद्र सेवा कार्य और भीलवाड़ा के डॉ. ब्रजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान ट्रस्ट के खातों में जमा होने की जानकारी मिली थी।
विभाग ने जनजागृति सेवा संस्थान का आडिट करने वाले मथुरा के सीए आशुतोष अग्रवाल के यहां कार्रवाई की। यह ट्रस्ट भीलवाड़ा के महेश त्रिवेदी व योगेश कुमार शर्मा का है। यहां से साक्ष्य मिलना शुरू हुए तो सर्च का दायरा मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, मथुरा, इंदौर तक बढ़ता चला गया। सर्च में पता चला कि शेल कंपनियों के बैंक खातों में पैसा चीन, हांगकांग, सिंगापुर, मलेशिया व दुबई भेजा गया।
आभूषण कारोबारियों को पैसा ट्रांसफर कर हीरों की खरीद की गई। तस्करी कर हीरों को भारत लाने के पांच मामलों की जानकारी विभाग को मिली। गुजरात व महाराष्ट्र में हीरों की बिक्री कर नकद धनराशि जुटाई गई। इसे हवाला कारोबार के माध्यम से देश के कोने-कोने में भेजा गया।