बदहाली के दौर से गुजर रहे जिले के अधिकांश तालाब

जांजगीर चांपा। अविभाजित जांजगीर चांपा व सक्ती जिले के अधिकांश तालाब बदहाली के दौर से गुजर रहे है। इनके संरक्षण व संवर्धन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर बनाई गई स्वच्छता समिति महज कागजों में ही सिमटकर रह गई है।
गौरतलब है कि अविभाजित जांजगीर चांपा एवं सक्ती जिले में 653 ग्राम पंचायत एवं 920 राजस्व गांव की संख्या है, वहीं 7652 तालाबों है। इनमें 4457 शासकीय तो वही 2986 निजी तालाब है, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में तालाबों का संवर्धन एवं संरक्षण नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण अधिकांश तालाब इन दिनों अस्तित्व संकट की समस्या से जूझ रहे हैं। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए निस्तारी का प्रमुख संसाधन तालाब ही है, नी लेकिन तालाबों की साफ सफाई नहीं होने से अधिकांश तालाब जलकुंभी एवं कचरे से अटा पड़ा है। ग्राम पंचायतों में तालाबों के रखरखाव एवं साफ सफाई के लिए बनाई गई समिति महज कागजों में ही सिमट कर रह जाती है। पहले जहां ग्रामीण क्षेत्रों में धान सहित अन्य फसलों के लिए तालाबों के माध्यम से ही पानी पहुंचाया जाता था, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में तालाबों का उपयोग खेती-बाड़ी के लिए पहले की अपेक्षा अब कम होने लगा है। पहले 70 से 150 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई तालाबों के माध्यम से ही होती थी, लेकिन अब समय में परिवर्तन होने के साथ ज्यादातर सिंचाई नहर के माध्यम से होती है। हर साल गर्मी के दिनों में जल संकट की समस्या रहती है वही गांव के तालाबों का जलस्तर भी कम होने लगता है। ऐसे में पेयजल की समस्या भी मवेशियों के लिए होती है। इसके अलावा जल संकट के कारण ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले रहने वाले लोगों को कपड़े धोने स्नान एवं पेयजल के लिए भी जूझना पड़ता है। जांजगीर-चांपा जिले में सबसे अधिक तालाब नगर पंचायत खरौद में है। अकलतरा विकासखंड के नगर पंचायत नरियरा का रामसागर तालाब 100 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसके बाद चांपा शहर का राम बांध का तालाब भी तकरीबन 85 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाए तो आधुनिकता के इस दौर में लोग तालाबों का उपयोग भी कम कर रहे हैं, जबकि पूर्व के समय में संसाधनों की समस्या थी जिसके कारण स्नान के लिए तालाब का का ही ज्यादातर लोग उपयोग करते थे। यही वजह है कि तालाबों की साफ-सफाई नियमित तौर पर नहीं हो पा रही है।

RO No. 13467/10