ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं, 75 वर्षीय बुजुर्ग छह साल से लगा रहे तहसील के चक्कर

रामानुजगंज। नगर के वार्ड क्रमांक 12 निवासी 75 वर्षीय गफ्फार खान अपनी 20 डिसमिल जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार के लिए पिछले छह वर्षों से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी के कारण वे अपनी ही जमीन का विक्रय नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।मामले के अनुसार, आवेदक मो. हासिम खान पिता खलील खान, निवासी रामानुजगंज, थाना एवं तहसील रामानुजगंज, जिला बलरामपुर ने जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया है कि ग्राम रामानुजगंज स्थित भूमि खसरा नंबर 1173/1464/4, रकबा 0.081 हेक्टेयर भूमि उनके स्वत्व एवं आधिपत्य की क्रय की गई भूमि है। वर्ष 2006 के नामांतरण पंजी में उनका नाम दर्ज है तथा वे भूमि पर नियमानुसार काबिज कास्त हैं।आवेदक का आरोप है कि उक्त भूमि का नाम आज तक ऑनलाइन बी-1, खसरा एवं नक्शा में दर्ज नहीं किया गया है। इसके कारण उन्हें विभिन्न प्रकरणों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भूमि को ऑनलाइन दर्ज कराने के लिए उन्होंने आवेदन भी प्रस्तुत किया है, लेकिन अब तक सुधार नहीं हो सका है।इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 12 निवासी गफ्फार खान का कहना है कि उनकी जमीन ऑनलाइन रिकॉर्ड में दूसरे के नाम दर्ज हो गई है। त्रुटि सुधार के लिए वे पिछले छह वर्षों से राजस्व विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इस बीच उनकी पत्नी कैंसर से पीडि़त हो गईं, जिनके उपचार में अब तक लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और आगे भी करीब 20 लाख रुपये की आवश्यकता बताई जा रही है। आर्थिक संकट के चलते वे अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, परंतु ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम गलत दर्ज होने के कारण विक्रय संभव नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में लापरवाही का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर शीघ्र ऑनलाइन रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार किया जाए, ताकि पीडि़तों को राहत मिल सके।

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