बनाहिल में नई तकनीक से 3 पुराने बोर को संजीवनी

जांजगीर। विकासखंड अकलतरा के बनाहिल में लंबे समय से चले आ रहे पेयजल संकट को दूर करने हाइड्रो फ्रेक्चर तकनीक पर आधारित यूनिसेफ की मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले दिनों गर्मी में पानी की किल्लत से परेशान ग्रामीणों ने कलेक्टर से गुहार लगाई थी।
पीएचई ने जल स्रोतों में घटते स्तर को देखकर हाइड्रो फ्रेक्चर तकनीक के जरिए नलकूपों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 15 मार्च को यूनिसेफ की मशीन की मदद से कांतिपारा तिरुपति के घर और पामगढ़ रोड पर यात्री प्रतीक्षालय के पास हैंडपंपों में कार्य किया गया। इसका परिणाम सकारात्मक रहा। इस प्रक्रिया से नलकूपों की जल आवक क्षमता में वृद्धि हुई है। पंचायत भवन के पास 15 एलपीएम पानी मिलने वाला हैंडपंप अब 31 एलपीएम पानी दे रहा है। वहीं 24-25 मीटर तक पर्याप्त जल स्तर बना हुआ है। बनाहिल की आबादी लगभग 1629 है और यहां 17 हैंडपंप हैं। शेष हैंडपंपों में भी हाइड्रो फ्रेक्चर तकनीक से जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का काम जारी है। पीएचई के अनुसार जिन तीन नलकूपों पर तकनीक लागू की गई, वे पूरी तरह सफल रहे हैं। इनमें पामगढ़ रोड के प्रतीक्षालय के पास, क्रांति पारा के तिरुपति घर के पास और राम भरोसे घर के पास हैंडपंप शामिल हैं। यह तकनीक खासतौर पर कठोर चट्टानी क्षेत्रों में कारगर मानी जाती है और पुराने हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने में मदद करती है। तकनीक हैंडपंपों के लिए लगभग 90 फीसदी कारगर है। गहरे बोर में भी पानी का प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे जल स्तर स्थिर रहेगा। ट्टकार्यपालन अभियंता आदित्य प्रताप ने बताया कि पंचायत भवन के पास का हैंडपंप पहले 5-6 एलपीएम पानी दे रहा था, अब यह 23 एलपीएम तक पानी देने लगा है। इसी तरह अन्य हैंडपंपों में भी पानी की आपूर्ति बढ़ी है। पुराने नलकूपों को पुनर्जीवित करना न केवल खर्च और समय बचाता है, बल्कि गर्मी में पानी की चिंता भी नहीं करनी पड़ती।

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