
वाशिंगटन, १४ मार्च
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने कहा है कि व्यापार कानून के अनुच्छेद 301 के तहत 60 देशों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच कारखानों में उत्पादन और आपूर्ति में अनैतिक नीतियां अपनाए जाने और उससे अमेरिका को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए है। इसके तहत पता लगाया जाएगा कि क्या बंधुआ मजदूरों या कर्मचारियों को कम वेतन देकर या कर्मचारियों से जबरन काम करवाकर वस्तुओं का उत्पादन किया गया।यदि इस तरीके से बने किसी सामान की अमेरिका को आपूर्ति कर लाभ कमाया गया होगा तो उस देश पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए टैरिफ को गैरकानूनी बताकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
इससे बौखलाए ट्रंप ने फैसला देने वाले न्यायाधीशों की तीखी आलोचना की और अब वह नए सिरे से टैरिफ लगाने के बहाने तलाश रहे हैं। इसी के तहत ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को भारत, चीन समेत 16 प्रमुख व्यापार सहयोगी देशों के खिलाफ कारोबार में अनैतिक नीतियां अपनाने की जांच शुरू करने की घोषणा की थी। लेकिन जांच का दायरा बढ़ाकर 60 देशों में करने का एलान किया गया है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि बंधुआ या कम वेतन वाले कर्मचारियों से कराए गए काम से बना उत्पाद अमेरिकी कर्मचारियों और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचाता है। क्योंकि अनैतिक तरीके अपनाकर कारखानों में किया गया उत्पादन का लागत मूल्य अपेक्षाकृत कम होता है जिससे बाजार में अमेरिकी उत्पादों को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। इन 60 देशों में अमेरिका ने भारत, चीन समेत अपने कई घनिष्ठ मित्र राष्ट्रों को भी शामिल किया है। गुरुवार की जांच से बच गया कनाडा, ब्रिटेन, इजरायल, आस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, कतर, ताइवान, रूस और कई देश नई सूची में शामिल किए गए हैं। वैसे सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद ट्रंप ने कई देशों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।





















