
नई दिल्ली। एनआइए की विशेष अदालत ने एक प्रमुख आरोपित को सिम कार्डों और इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों के दुरुपयोग के पाकिस्तान-प्रेरित जासूसी साजिश मामले में पांच साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई है।
एनआइए के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि आरोपित अल्ताफहुसैन घांचीभाई उर्फ शकील को परीक्षण के दौरान दोषी ठहराया, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा 37 गवाहों की जांच की गई थी।
विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय एजेंसी एनआइए की विशेष अदालत ने मंगलवार को सिम कार्डों, एक बार के पासवर्ड (ओटीपी) और इंटरनेट मीडिया के दुरुपयोग के लिए आरोपित को दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई।
इसके अनुसार, घांचीभाई को अवैध गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 (साजिश के लिए सजा, आदि) के तहत पांच साल और छह महीने की साधारण कारावास की सजा और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66सी (पहचान चोरी के लिए सजा) के तहत दो साल और छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई।
साथ ही प्रत्येक धारा के तहत 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। एनआइए के एक बयान में कहा गया कि दोनों सजा एक साथ चलेंगी, जिससे अधिकतम अवधि 5.5 साल होगी।
यह सीमा पार की साजिश का मामला उन भारतीय सिम कार्डों के उपयोग से संबंधित है जो पाकिस्तान नौसेना द्वारा ‘हाई सी’ में मछली पकड़ने के दौरान गिरफ्तार किए गए मछुआरों के थे। इन मछुआरों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड पाकिस्तान नौसेना द्वारा जब्त किए गए थे और बाद में आरोपित द्वारा भारत में जासूसी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए सक्रिय किए गए थे।

































