
कोरबा। जिले में स्थित पूर्ववर्ती लैंको अमरकंटक को अडानी ग्रुप ने अधिग्रहित किया है। अब इस प्लांट में 800 मेगावाट के विस्तार की योजना सामने आई है। 27 फरवरी को केपीएल की प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ग्राम सरगबुंदिया में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
सरगबुंदिया के सरपंच, बीडीसी सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर साफ कहा है कि वे प्लांट विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के पास पहले से उपलब्ध भूमि पर ही विस्तार किया जाए।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि गांव की जमीन आजीविका का प्रमुख साधन है—खेती, चराई और स्थानीय संसाधन ग्रामीणों की रोजी-रोटी से जुड़े हैं। ऐसे में और जमीन अधिग्रहण से सामाजिक व आर्थिक संकट गहरा सकता है। ग्रामीणों का तर्क है कि उद्योग विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास की कीमत गांव की जमीन और पर्यावरण नहीं हो सकता। उनका कहना है कि—कंपनी पहले से अधिग्रहित भूमि का समुचित उपयोग करे।पर्यावरणीय प्रभावों की पारदर्शी जानकारी दी जाए। स्थानीय लोगों को रोजगार और पुनर्वास के स्पष्ट प्रावधान बताए जाएं। 800 मेगावाट विस्तार के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, लेकिन इससे प्रदूषण, जल उपयोग और परिवहन दबाव भी बढऩे की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से संचालित इकाई के प्रभावों का आकलन सार्वजनिक होना चाहिए, तभी किसी नए विस्तार पर विचार संभव है। 27 फरवरी की जनसुनवाई पर नजर।अब सबकी निगाहें 27 फरवरी को होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और कंपनी ग्रामीणों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाते हैं।


















