सरकारी अस्पतालों में बिचौलियों की अब खैर नहीं, डीएम ने निजी एंबुलेंसों के लिए भी तय किए कड़े नियम

हाजीपुर। सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों को गुमराह कर निजी नर्सिंग होम और जांच केंद्रों में भेजने वाले सिंडिकेट पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने और मरीजों को बिचौलियों के चंगुल से बचाने के लिए बेहद कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि दलाली में संलिप्त पाए जाने वाले एंबुलेंस चालकों, बाहरी व्यक्तियों या अस्पताल कर्मियों को सीधा जेल भेजा जाएगा।

जिले में संचालित सभी निजी एंबुलेंसों का व्यावसायिक पंजीकरण अनिवार्य होगा। प्रत्येक एंबुलेंस में जीपीएस और वीएलटीडी (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) लगाना भी अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एंबुलेंस का उचित भाड़ा तय करने के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी, सिविल सर्जन और डीपीएम (स्वास्थ्य) की तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। बिचौलियों और दलालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सभी अनुमंडल पदाधिकारियों और पुलिस अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अस्पतालों में सक्रिय दलालों की पहचान कर सूचना संकलन के आधार पर औचक छापेमारी करें और दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराएं। अस्पतालों में तैनात निजी सुरक्षा गार्डों की संभावित साठगांठ को रोकने के लिए उन्हें प्रत्येक तीन माह पर रोस्टर के अनुसार बदलने का आदेश दिया गया है। लापरवाही बरतने या दलालों का सहयोग करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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