अब दवा कंपनियों को अनुसंधान के संबंध में टेस्ट लाइसेंस लेने की नहीं होगी जरूरत, सरकार ने नियमों में किया संशोधन

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने फार्मा उद्योग को सु²ढ़ बनाने के उद्देश्य से नए औषधि एवं क्लीनिकल परीक्षण नियमों, 2019 में संशोधनों को अधिसूचित किया है। नए नियमों के तहत अब दवा कंपनियों को अनुसंधान और विश्लेषण के संबंध में कम मात्रा में दवाओं के निर्माण के लिए टेस्ट लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि इसके लिए उन्हें कुछ मामलों को छोड़कर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को आनलाइन सूचना देनी होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ये संशोधन नियामकीय बोझ को कम करने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं।

मौजूदा नियामक ढांचे के तहत दवा कंपनियों को परीक्षण, अनुसंधान या विश्लेषण के उद्देश्य से कम मात्रा में दवाओं के निर्माण के लिए सीडीएससीओ से परीक्षण लाइसेंस अनिवार्य होता है।

मंत्रालय को उम्मीद है कि इन संशोधनों से दवा तैयार करने की प्रक्रिया में कम से कम 90 दिनों की बचत होगी। इससे औषधि अनुसंधान और नवाचार को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। जबकि जिन श्रेणियों में परीक्षण लाइसेंस की आवश्यकता बनी रहेगी, उनके लिए वैधानिक प्रसंस्करण अवधि को 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है।

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