
नईदिल्ली, 0६ फरवरी ।
तमिलनाडु की स्टालिन सरकार में कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के उत्तर भारतीय प्रवासी मजदूरों पर दिए गए पानी-पूरी संदर्भ वाले बयान के बाद राज्य में हिंदी बनाम गैर हिंदी और उत्तर बनाम दक्षिण का विवाद और भी गहरा गया है।घटनाक्रम की शुरुआत उस वक्त हुई जब चेंगलपट्टू में एक कार्यक्रम में मंत्री पन्नीरसेल्वम ने तीन भाषाओं के मुद्दों फिर से हवा देते हुए दावा किया कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) की वजह से हमारे बच्चे अमेरिका, लंदन जैसी जगहों पर जाकर करोड़ों कमा रहे हैं, जबकि उत्तर भारत के लोग राज्य में आकर निम्न स्तर के काम कर रहे हैं।
पन्नीरसेल्वम ने कथित तौर पर कहा, उत्तर भारत के लोग तमिलनाडु में मेजें साफ करने आ रहे हैं.. वे यहां निर्माण मजदूर, पानी-पूरी बेचने वाले बनकर आ रहे हैं क्योंकि उन्होंने सिर्फ ङ्क्षहदी ही सीखी है। इस टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी और भाषा व क्षेत्रीय अस्मिता की बहस फिर उभर आई। बता दें कि कुछ महीनों में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव है।भाजपा व सहयोगियों का करारा हमला बयान सामने आते ही भाजपा ने इसे उत्तर भारतीयों का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर द्रमुक नेता का साथ देने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि क्या विपक्षी गठबंधन के अन्य दल, सपा और राजद, भी इस रुख का समर्थन करेंगे। वहीं, तमिलनाडु बीजेपी के प्रमुख नैनार नागेंद्रन ने इंटरनेट प्लेटफार्म एक्स पर पन्नीरसेल्वम के बयान की तीखी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं है, बल्कि एक पैटर्न बन चुका है। भाजपा ने कहा- द्रमुक के कई नेता प्रवासी मजदूरों का, विशेषकर उत्तर भारतीय या ङ्क्षहदी बोलने वालों का बार-बार मजाक उड़ा चुके हैं। ऐसे में जब तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है, इस तरह के बयान गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक्स पर लिखा कि कुछ नेता ऐसे हैं जो अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहना चाहते हैं।
राजग सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है। वहीं अन्नाद्रमुक ने भी मंत्री की टिप्पणी को निंदनीय बताया और कहा कि प्रवासी मजदूर तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, ऐसे में इस तरह की भाषा उचित नहीं है।द्रमुक डैमेज कंट्रोल में जुटी लगातार बढ़ती आलोचना के बीच मंत्री के बयान पर डैमेज कंट्रोल की कोशिशें भी तेज हुईं और द्रमुक ने बचाव की रणनीति अपनाई। पार्टी के लोकसभा सांसद टीआर बालू ने कहा कि मंत्री के बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया और उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।




























