
डाइट में इसके लिए दिया गया प्रशिक्षण
कोरबा। जिले में सरकारी शिक्षकों की क्षमता का भरपूर उपयोग करने की मानसिकता बना ली गई है। प्रदेश के साथ इस जिले में अब शिक्षकों को अपने स्कूल में 6 घंटे और नजदीकी आंगनबाड़ी में 3 घंटे क्लास लेनी पड़ेगी। आंगनबाडिय़ों के बच्चों को शिक्षण के मामले में मजबूत करने का इरादा है। लेकिन इस व्यवस्था से शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है।
संकुल के बाद शिक्षकों को जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) विशेष रूप से तीन दिन का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें एक या दो-दो विकासखंड से ऐसे शिक्षकों को चयनित किया गया। जिनके यहां आंगनबाड़ी संचालित हैं। स्कूल से आंगनबाड़ी की नजदीकी को इसका आधार बनाया गया है। इस व्यवस्था में वे स्कूल के शिक्षक शामिल नहीं किए गए हैं जिनके आसपास में ऐसे केंद्र नहीं हैं। अंतिम चरण में 120 शिक्षकों को डाइट में कई सत्र में इस विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। 20 से 22 फरवरी को इस प्रशिक्षण का आयोजन स्थानीय डाइट में किया गया। खबर के अनुसार अपने स्कूलों में शिक्षकों को 6 घंटे तो देना ही है इसके अलावा तीन घंटे की सेवाएं पास की आंगनबाड़ी में भी देना ही होगा। इसके अंतर्गत वे बच्चों को सामान्य शिक्षण से जोड़ेंगे। खेल-खेल में सिखाने की तकनीक पर विशेष रूप से काम किया जाना है। फ्रेंडली माहौल में बच्चे कैसे सीखते हैं इसका विशेष ध्यान रखा जाना है। मास्टर ट्रेनर्स की ओर से तीन दिन के प्रशिक्षण में शिक्षकों को ऐसे ही अनेक बिंदुओं के बारे में अवगत कराया गया। इस दौरान उनसे यह भी जानकारी ली गई कि इससे पूर्व संकुल स्तर पर मिले प्रशिक्षण से उन्होंने क्या कुछ सीखा और इसका कितना लाभ मिला। खबर के अनुसार तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद आगे की कार्ययोजना तय होगी और इसके बाद ही प्रशिक्षित शिक्षक अपने अतिरिक्त काम में भी जुड़ेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें अलग से कोई मानदेय नहीं मिलना है।
कई परेशानियां आएंगीं, बताया शिक्षकों ने
सरकार के निर्देश पर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भले ही शिक्षकों को प्रशिक्षण दे दिया गया है और काम बता दिया गया है। लेकिन उनसे जुड़ी समस्याओं का समाधान किसी के पास नहीं है। बताया गया कि प्रशिक्षण के अंतर्गत शिक्षकों की ओर से ऐसे कई सवाल किए गए जिनका जवाब किसी के पास नहीं था। अधिकारियों को बताया गया कि अनेक स्कूलों में केवल दो ही शिक्षक हैं, इनमें एक प्रधान पाठक और दूसरा एक सहायक शिक्षक है। कार्यालयीन कामकाज को लेकर प्रधान पाठक बाहर रहते हैं तो पूरा जिम्मा सहायक शिक्षक का होता है। ऐसी स्थिति में दोहरी जिम्मेदारियां कैसे निभाई जा सकेंगी।






















