
बैकुंठपुर (कोरिया)। सहकारिता विभाग कोरिया के अंतर्गत आदिवासी जाति सेवा सहकारी समिति, सलबा (बैकुंठपुर) में हाल ही में हुई नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समिति में जनपद सदस्य को अध्यक्ष तथा प्राधिकृत अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। इस संबंध में बैकुंठपुर निवासी राजेश राजवाड़े द्वारा एक लिखित शिकायत सहायक आयुक्त सहकारिता विभाग को सौंपी गई है, जिसमें नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की गई है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में जनपद पंचायत बैकुंठपुर के एक जनपद सदस्य को उक्त सहकारी समिति का अध्यक्ष एवं प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जनपद सदस्य रहते हुए सरकारी मानदेय प्राप्त करने वाला व्यक्ति किसी सहकारी संस्था का प्राधिकृत अधिकारी नहीं हो सकता। यह स्थिति स्पष्ट रूप से हितों के टकराव की श्रेणी में आती है।
राजवाड़े ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित व्यक्ति को पहले तत्काल समिति का सदस्य बनाया गया और उसी समय अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया गया। यह प्रक्रिया सहकारी भावना, पारदर्शिता और निष्पक्षता के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। शिकायत में कहा गया है कि ऐसी नियुक्ति न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि शासन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सहकारी समितियों का उद्देश्य आम लोगों को जोडऩा और पारदर्शी तरीके से कार्य करना होता है, लेकिन इस तरह की जल्दबाज़ी में की गई नियुक्ति से संदेह उत्पन्न होता है कि प्रक्रिया में प्रभावशाली व्यक्तियों का हस्तक्षेप रहा है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि विभाग इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
शिकायत पत्र दिनांक 6 अगस्त 2025 को प्रस्तुत किया गया है, जिस पर संबंधित अधिकारी की मुहर एवं प्राप्ति तिथि दर्ज है। शिकायतकर्ता ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि नियुक्ति प्रक्रिया का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाए तो उसे निरस्त किया जाए।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस मामले ने सहकारी विभाग के भीतर हलचल मचा दी है और विभाग के अधिकारी इस पर जांच प्रारंभ करने की तैयारी में हैं। वहीं, जनपद पंचायत के कुछ सदस्यों ने भी इस नियुक्ति को लेकर असंतोष व्यक्त किया है।
जनता और सहकारी समिति के सदस्यों का कहना है कि यदि शिकायत में बताए गए तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह सहकारी सिद्धांतों का उल्लंघन है और इस पर तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए। अब देखना यह होगा कि विभाग इस आपत्ति पर क्या कदम उठाता है और क्या नियुक्ति को रद्द किया जाएगा या नहीं।























