सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने के लिए होड़ लगी, उदासीन बने अधिकारी

केरा। केरा में स्थित शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय की 60 डिसमिल भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। अब स्थिति यह है कि कभी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आरक्षित यह भूमि अब केवल 3 से 4 डिसमिल की तंग जगह में सिमट गई है। खसरा क्रमांक 2048, पटवारी हल्का क्रमांक 23, तहसील शिवरीनारायण में दर्ज यह भूमि प्रशासनिक उदासीनता और राजस्व विभाग की लापरवाही की साफ तस्वीर पेश कर रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह कब्जा हाल का नहीं, बल्कि वर्षों से जारी है। स्थिति से संबंधित जानकारी न केवल पटवारी और तहसीलदार तक है, बल्कि उच्च अधिकारियों को भी दी है। बावजूद इसके आज तक न कोई जांच हुई और न ही अतिक्रमण हटाने की पहल। ग्रामीणों का मानना है कि अतिक्रमणकारियों को प्रशासन की ‘मौन सहमति’ हासिल है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं और सरकारी जमीन को वे अपनी निजी संपत्ति समझ बैठे हैं।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए, तो औषधालय के लिए पर्याप्त भूमि फिर प्राप्त की जा सकती है। इससे न केवल एक बेहतर भवन निर्माण संभव होगा, बल्कि दवाओं का भंडारण और आधुनिक आयुर्वेदिक उपचार की सुविधाएं भी ग्रामीणों को सुलभ होंगी। ट्ट ग्राम पंचायत को अधिकार है कि पंचायत की जमीन को सुरक्षित रखने कदम उठाए, लेकिन पंचायत ध्यान नहीं देती। इससे गांव में अतिक्रमण बढ़ता है, मामला सामने आया है जांच कर कार्रवाई की जाएगी। संजय बरेठ, नायब तहसीलदार

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