
नईदिल्ली, १० जुलाई ।
बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसे लेकर राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियों में जुट गई है। इस बीच चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया है।9 जुलाई विपक्षी पार्टियों के बड़े-बड़े नेता भी सडक़ पर उतरे और चक्का जाम किया। इस विरोध प्रदर्शन में तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और दीपांकर भट्टाचार्य जैसे शीर्ष नेता भी शामिल हुए। विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के बाद अब लीगल बैटल की बारी है। वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है और आज सर्वोच्च न्यायालय में इस पुनरीक्षण देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होने वाल है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफर्मस ने चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती देते हुए 5 जुलाई को याचिका दायर की थी।ADR के बाद राष्ट्रीय जनता दल , कांग्रेस समेत 9 राजनीतिक पार्टियों ने भी सर्वोच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी है। विपक्षी दलों औरADR की ओर से दायर की गई याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था।
इन याचिकाओं में 5 बड़े सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम 1 जनवरी, 2003 को जारी की गई वोटर लिस्ट में हैं, उन्हें कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग ने बताया कि वे सभी लोग संविधान के अनुच्छेद 326 के तगत प्राथमिक तौर पर भारत के नागरिक माने जाएंगे। जिन लोगों के माता-पिता के नाम तब की मतदाता सूची में दर्ज है, उनको केवल अपनी जन्म तिथि और जन्म स्थान से संबंधित दस्तावेज देने होंगे।















