आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान का दिखावा, FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकल कर भी हरकतों से बाज नहीं आ रहा पाक

ओटावा। पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर किए जाने के फैसले पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

 आतंकी समूहों की गतिविधियां और फंडिंग बेरोकटोक जारी

कनाडा स्थित ‘जियोपोलिटिकल मॉनिटर’ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान को इस सूची से हटाना ”समय से पहले लिया गया निर्णय” था, क्योंकि देश में आतंकी समूहों की गतिविधियां और फंडिंग बेरोकटोक जारी है। फिर से सक्रिय हुए आतंकी संगठन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी समूह एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। उनकी निरंतर परिचालन क्षमता यह दर्शाती है कि पाकिस्तान मनी लांड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर वैश्विक संस्था की सिफारिशों का पालन करने में विफल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ”’साक्ष्य बताते हैं कि सत्ता प्रतिष्ठान इन आतंकवादी संगठनों के पुनरुद्धार को बढ़ावा दे रहे हैं या कुछ मामलों में उन्हें सुविधा भी प्रदान कर रहे हैं।”’ बोर्ड ऑफ पीस’ व कूटनीतिक प्रयास दावोस में पाकिस्तान ने राष्ट्रपति ट्रंप के नए ‘बोर्ड आफ पीस’ में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की है। हालांकि, इसे पाकिस्तान की अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

‘जियोपोलिटिकल मॉनिटर’ ने स्पष्ट किया है कि पिछले 12 महीनों की घटनाओं ने ऐसी पहलों में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है।

फरवरी में होने वाली एफएटीएफ की पूर्ण बैठक से पहले, ये आरोप पाकिस्तान के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान में अनसुलझे ‘टेरर फाइनेंसिंग’ जोखिम अभी भी मौजूद हैं, जिन पर वैश्विक समुदाय को तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

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