
पीलीभीत, १३ फरवरी ।
बीसलपुर के स्कूल का चपरासी इल्हाम शम्सी आठ वर्ष पहले जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में संबद्ध होने के बाद कागजों की बाजीगरी करने लगा। क्लर्क वाली कुर्सी पर बैठने के बाद उसने सरकारी खजाने में सेंधमारी कर पत्नी अर्शी के खाते में 1.01 करोड़ रुपये भेज दिए।तीन दिसंबर को बैंक आफ बड़ौदा प्रबंधन को बचत खाते में धड़ाधड़ आ रही धनराशि पर शक हुआ, तब डीएम को 17 दिसंबर 2025 को जानकारी दी गई। डीएम ने मामले का संज्ञान लेकर मामले की जांच कराई। इधर, बैंक ने 65.53 लाख रुपये की धनराशि को फ्रीज कर दिया, जबकि आरोपित ने 36,41,885 रुपये आरोपित ने निकाल लिए।मामले की जांच डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम को सौंप दी। सीडीओ राजेंद्र कुमार श्रीवास ने पांच फरवरी को जिला विद्यालय निरीक्षक को नोटिस जारी करके जांच के लिए अभिलेख मांगे। जांच कमेटी के पत्र जारी होने के बाद मामला तूल पकड़ गया।
जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आरोपित पर अग्रिम कार्रवाई होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग से शासकीय सहायता प्राप्त एक कालेज में इल्हाम शम्सी की नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर हुई थी। शासनादेश के अनुसार, उसे मूल पद पर ही काम करना चाहिए था मगर, ऐसा नहीं हुआ। वह जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लिपिकीय कार्य करने लगा था। बैंक आफ बड़ौदा के रिकार्ड के अनुसार, उसने वर्ष छह जून 2024 में अपनी पत्नी अर्शी खातून का बचत खाता खुलवाया था। इसके बाद अधिकारियों से अपनी पत्नी के बैंक खाते में धनराशि भेजने की स्वीकृति करा 12 जून 2024 को करा ली। आरोपित ने पहली बार 12 सितंबर को उस खाते में एक लाख रुपये ट्रेजरी से ट्रांसफर कराए थे, उसी दिन दूसरी बार भी एक लाख रुपये ट्रांसफर हुए।इसके बाद प्रत्येक महीने दो से छह बार तक ट्रेजरी से रकम आती रही। 17 दिसंबर 2025 तक उसके खाते में 98 ट्रेजरी से रकम आई, जोकि 1.01 करोड़ रुपये थी। आरोपित ने 17 दिसंबर 2025 तक 36.41 लाख रुपये यूपीआइ के माध्यम से निकाल लिए।
इस लेनदेन पर बैंक प्रबंधन को शक हुआ, क्योंकि बचत खाता खुलवाते समय अर्शी खातून को नौकरपेशा दर्शाया गया ना ही व्यापारी।ऐसे में हर महीने एक लाख रुपये से अधिक रुपये ट्रेजरी से आने पर शक गहराया। पांच फरवरी को सीडीओ ने जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार से पूछा कि इतनी रकम किस मद में ट्रेजरी से ट्रांसफर कराई गई। डीएम ने भी विस्तृत जांच बैठा दी, जिसमें आरंभिक तौर पर कई गड़बडिय़ां सामने आई हैं।नियमानुसार, जिला विद्यालय निरीक्षक के हस्ताक्षर से प्रतिमाह वेतन आदि के बिल बनकर ट्रेजरी पहुंचाए जाते हैं। उन्हीं के आधार पर ट्रेजरी से संबंधित खातों में रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं। लिपिकीय कार्य करने वाले चपरासी इल्हाम को इसकी जानकारी थी। उसने योजनाबद्ध तरीके से पत्नी का बैंक खाता खुलवाया।इसके बाद फर्जी बिल बनाकर हर माह हस्ताक्षर करा लेता था, उसी आधार पर ट्रेजरी से रकम ट्रांसफर कर दी जाती थी। ऐसे में जिला विद्यालय निरीक्षक की जिम्मेदारी होती है कि वह प्रत्येक बिल की जांच कर अग्रसारित करेंगे मगर, ऐसा नहीं हो सका। पूरे प्रकरण में कार्यालय के कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता की आशंका जताते हुए जांच में शामिल किया है। जांच बैठने के बाद इल्हाम कार्यालय नहीं आया।इल्हाम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने के बाद भी लिपिकीय कार्य करता था। उसे आठ वर्षों में अलग- अलग पलट पर तैनाती दी गई। उसे मूल पद पर क्यों नहीं भेजा गया, इस पर जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार बोले कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।वह चार महीने पहले स्थानांतरित होकर आए। ऐसे में पूर्व से काम करते आ रहे कर्मचारी अपने पुराना दायित्व निभाते रहे। इल्हाम शम्सी की पत्नी के बैंक खातों में रकम कैसे ट्रांसफर हुई, इसकी विस्तृत जांच सीडीओ कर रहे हैं।






















