
कोरबा। जिला प्रशासन और रेलवे के द्वारा 50-50 प्रतिशत राशि आपस में वहन करने के साथ संजय नगर रेलवे क्रॉसिंग के पास अंडरपास बनाया जाना प्रस्तावित है। एक वर्ष पहले इस क्षेत्र में दुकानों और मकान की तोडफ़ोड़ की गई लेकिन अब तक प्रोजेक्ट का काम शुरू नहीं हो सका है। लोगों को लगता है कि उनके साथ छलावा किया जा रहा है और उनकी समस्या बढ़ाई जा रही है।
संजय नगर रेलवे क्रॉसिंग के बार-बार बंद होने और जाम की वजह से लोगों को हो रही परेशानी को दूर करने की इरादे से इसका समाधान अंडरपास के रूप में खोजा गया है। लगभग 31 करोड रुपए इस प्रोजेक्ट पर खर्च किए जाने हैं। जिला प्रशासन कोरबा और रेलवे ने आपस में तय किया है की कुल लागत का आधा-आधा हिस्सा दोनों खर्च करेंगे। प्रोजेक्ट के अंतर्गत आसपास के दायरे में आने वाले 91 प्रभावित लोगों को 3 करोड रुपए की राशि मुआवजा के तौर पर उपलब्ध करा दी गई है। इसके साथ ही अंडरपास के दायरे में आने वाले ऐसे अनेक मकान और दुकानों को पिछले वर्ष नष्ट कर दिया गया। मौके पर इसके नमूने अभी भी नजर आ रहे हैं।
संजय नगर में अंडरपास प्रभावित लोगों का दर्द इस बात को लेकर है कि लंबे समय से उनके सामने समस्याएं आड़े आई है। उन्होंने किसी तरह यहां वहां रहने का ठिकाना खोजा। जिस उद्देश्य से उन्हें यहां से हटाने का काम किया गया उसे प्रोजेक्ट का कोई अता-पता नहीं है। लोगों की शिकायत है कि जो मुआवजा उन्हें दिया गया है उसमें ना तो जमीन खरीदी जा सकती और ना ही मकान का निर्माण किया जा सकता।
यहां बताना जरूरी होगा कि नगरपालिका निगम के द्वारा रेलवे क्रॉसिंग के एक हिस्से से पाइपलाइन की शिफ्टिंग कर ली गई है जबकि पुल के नीचे के हिस्से का काम अभी भी बचा हुआ है रेलवे ने इसके लिए अनुमति नहीं दी है। जबकि कई बार उससे पत्राचार हो चुका है। वही प्रभावित क्षेत्र के कुछ लोगों के मामले हाईकोर्ट में लंबित थे और इस पर विवाद कायम है। छत्तीसगढ़ सेतु निगम को अंडरपास निर्माण के लिए एजेंसी बनाया गया है जिसने टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली है। दुर्गा की एक कंपनी को यह काम दिया गया है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि कोरबा के प्रथम रेल अंडरपास का काम आखिर कब शुरू होता है और कितने वर्ष में पूरा हो सकेगा



















