खोखरा डंपिंग यार्ड से जनता त्रस्त दूषित वातावरण से चलना हुआ दूभर

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर में स्वच्छता व्यवस्था की पोल खोलता हुआ खोखरा रोड स्थित कचरा डंपिंग यार्ड गंभीर जनसमस्या का रूप ले चुका है। शहर भर से एकत्र किया जा रहा कचरा बिना किसी वैज्ञानिक निस्तारण के खुले में डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के रहवासी इलाकों में बदबू और मच्छरों का आतंक है। वहीं बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
नगर पालिका द्वारा वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट से कचरे के सुरक्षित निपटान का प्लान तैयार किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। जांजगीर का खोखरा रोड स्थित कचरा डंपिंग यार्ड शहरवासियों के लिए बड़ीपरेशानी का सबब बन गया है। कई सालों से यहां पर डंप होने वाला कचरा सडक़ किनारे खुले मैदान में जमा हो रहा है। इससे न सिर्फ भारी दुर्गंध फैल रही है बल्कि आसपास के आवासीय इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या उभरी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर प्रशासन द्वारा कूड़े का वैज्ञानिक निस्तारण और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम शुरू करने के नाम पर कई योजना घोषित की गई थीं। लेकिन इन प्रोजेक्टों का क्रियान्वयन अधूरा रहने के कारण कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा है और कोई ठोस समाधान अब तक नहीं
मिल पाया हैं। खोखरा रोड पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर सडक़ के किनारे तक फैल चुके हैं। हवा चलते ही कचरा उडक़र सडक़ और आसपास के मोहल्ले में पहुंच जाता है। कई जगहों पर कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे जहरीला धुआं निकलता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। स्थानीय निवासियों का, कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, एलर्जी और बुखार जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। नगर पालिका द्वारा घर-घर अलग करने और प्रोसेसिंग यूनिट कचरा संग्रहण, गीला-सूखा कचरा के दावे किए गए थे, लेकिन हकीकत में खोखरा डंपिंग यार्ड में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। जानकारों का मानना है कि जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट दम तोड़ चुका है।

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