
कोरबा। कोरबा जिले में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर स्पेशल इंसेंटिव रिविजन (एसआई आर) की प्रक्रिया जारी है। हर विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या का आंकड़ा परिवर्तित होने की खबर है। इन सबके बीच मतदाताओं की पात्रता तय करने के लिए 2003 की सूची से मिलान के बाद अगली प्रक्रिया तय की जा रही है। इधर विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है, जिनके नाम सूची में नहीं है। उनकी चिंता है कि क्या मताधिकार नहीं मिलने से उनकी नागरिकता खतरें में आ जायेगी।
कोरबा जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में (एसआईआर) पर काम चल रहा है। कामकाज को लेकर पहले ही मास्टर टे्रनर्स की ओर से बीएलओ को प्रक्रिया समझाने प्रशिक्षण दिया गया। गणना प्रपत्र भरने और संबंधित दस्तावेज के विकल्प की जानकारी दी गई। अपने क्षेत्र में गणना प्रपत्र वितरण के साथ उन्हें जमा कराया जा रहा है। इसी के साथ इसे डिजिटलाईजेशन की प्रक्रिया का हिस्सा भी बनाया जा रहा है। खबर के अनुसार 4 दिसंबर तक इस काम को करना है। विधानसभा क्षेत्रवार इसका शेड्यूल ईसीआई ने तय किया है। जागरूक और शिक्षित वर्ग के सामने प्रक्रियाओं को पूरा करने में अड़चनें नहीं है। इसके ठीक उल्टे निर्वाचन से जुड़े कार्य और इसकी उपयोगिता को लेकर उदासीन रहने वाला वर्ग कई वजह से परेशान है। कोरबा, बालकोनगर, दीपका, कटघोरा और बांकीमोंगरा में अनेक मामले सामने है, जिन्में एक परिवार के कुछ लोगों के नाम 2003 की सूची में है और बाकी गायब। लोगों को दावा है कि उन्होंने कहीं से नाम कटाया नहीं है, तब भी ऐसे लोग अपने वोटर कार्ड लेकर बीएलओ के चक्कर लगा रहे है। बीएलओ का कहना है कि लोगों की गलती से ऐसा हुआ होगा। अब हम कुछ नहीं कर सकते। लोगों की चिंता और अह्म सवाल ये है कि अगर उन्होंने पहले वोट डाला है और अपने परिवार का हिस्सा है तो भी क्या सूची से नाम कटने पर वे क्या मताधिकार और नागरिकता खो देंगे? लोगों को इसका जवाब अब तक नहीं मिल सका हैैं।

















