
कोरबा । कोल कंपनी बोर्ड की मंजूरी से ही अब कोयला खदानें खुल सकेगी। इसके लिए कोल कंट्रोलर आर्गेनाइजेशन (सीसीओ) की अनुमति जरूरी नहीं होगी। साल 2030 तक कोल इंडिया की योजना भूमिगत खदानों से 100 मिलियन टन कोयला उत्पादन की है। लेकिन एसईसीएल की कई भूमिगत खदानें जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण अघोषित रूप से बंद है। फिर से खनन शुरू करने पर इनकी प्रक्रिया को पूरा करने में राहत मिलेगी। दूसरी ओर भूमिगत खदानों से खनन शुरू होने पर लगभग 4 साल में अंडरग्राउंड माइंस से 100 मिलियन टन तक उत्पादन की योजना साकार होगी। कोयला खदानों के संचालन के लिए केन्द्र स्तर पर भी कई जरूरी अनुमति लेनी होती है। कोलियरी कंट्रोल रूल्स 2004 के अनुसार कोयला खदान खोलने के साथ ही अलग-अलग जमीन के नीचे कोयले की परत और इनके हिस्सों में संचालन के जानकारी कोल कंट्रोलर आर्गेनाइजेशन को देनी होगी। जरूरी अनुमति मिलने के बाद बंद भूमिगत खदानें एमडीओ मोड में जा सकता है। इससे निजी कंपनी का माइन डेवलपर ऑपरेटर को खनन का अधिकार मिलेगा। जानकार बताते हैं कि पर्यावरण मंत्रालय से समय रहते अनुमति नहीं ली गई। इस कारण खदान के संचालन को यथावत नहीं रखा गया है। जबकि कई बंद भूमिगत खदान में रिजर्व कोयले को निकाला नहीं जा सका है। संबंधित खदानों के कंपनी बोर्ड के पास अब मंजूरी का अधिकार रहने और कोल कंट्रोलर आर्गेनाइजेशन की अनुमति जरूरी नहीं होने का लाभ खदानों का संचालन जल्द शुरू करने में लाभ मिलेगा।

























