
कोलकाता, 15 मार्च ।
कोलकाता में हुई झड़पों को लेकर भाजपा और टीएमसी के बीच सियासी घमासान रविवार को भी जारी रहा। यह टकराव कोलकाता के गिरिश पार्क इलाके में उस समय हुआ, जब शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए। बताया जा रहा है कि दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाले संबोधन से पहले माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान कोलकाता पुलिस के एक इंस्पेक्टर और पश्चिम बंगाल सरकार के एक मंत्री के घायल होने की भी खबर सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने रातभर अभियान चलाकर अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, पश्चिम बंगाल भाजपा इकाई ने आरोप लगाया है कि पुलिस की कार्रवाई एकतरफा है। पार्टी का कहना है कि उसके समर्थकों को निशाना बनाया गया है। भाजपा का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में शामिल होने जा रहे समर्थकों की बस पर हमला किया गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि हिंसा की शुरुआत भी सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं ने ही की थी। इस मामले में न तो तृणमूल कांग्रेस और न ही भाजपा ने औपचारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कराई है। इसके बावजूद कोलकाता पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। अब तक गिरफ्तार किए गए चार लोगों में तीन भाजपा समर्थक बताए जा रहे हैं, जिनमें कृषाणु बोस, सनी डे और चरणजीत सिंह के नाम शामिल हैं। कोलकाता नगर निगम के भाजपा पार्षद सजल घोष ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन तीन भाजपा समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है, वे झड़प के समय घटनास्थल के आसपास भी मौजूद नहीं थे। सजल घोष ने कहा, मैं कोलकाता पुलिस को चुनौती देता हूं कि वह उस समय की सीसीटीवी फुटेज जारी करे। साथ ही इन लोगों की मोबाइल टावर लोकेशन भी सार्वजनिक की जाए। तृणमूल कांग्रेस के दबाव में पुलिस ने उन्हें बेवजह गिरफ्तार किया है और उन पर हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी लगा दिए हैं।

























