पोराबाई कांड : टॉपर छात्रा व केंद्राध्यक्ष समेत चार को 5-5 साल की सजा

जांजगीर-चांपा। बहुचर्चित पोराबाई नकल प्रकरण में 17 साल बाद कोर्ट ने आरोपियों को सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने मामले में दंडादेश जारी किया है। छात्रा पोरा बाई के साथ स्कूल के प्राचार्य और केंद्राध्यक्ष सहित 4 लोगों को 5-5 साल कठोर कावास और 5-5 हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया गया है।
जांजगीर चाम्पा जिला में वर्ष 2008 में बारहवीं की परीक्षा में प्रदेश में बिर्रा की छात्रा पोराबाई ने टॉप किया था। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित परीक्षा में सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा में पोराबाई शामिल हुई थी। रिजल्ट आया तो पोराबाई स्टेट टॉपर बन गई। पोराबाई के स्टेट टॉपर होने पर संदेह होने के कारण माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा उसको उत्तरपुस्तिकाओं की जांच कराई गई। जांच में पोराबाई को उत्तर पुस्तिकाओं और दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। पोराबाई सहित 9 लोगों के खिलाफ बम्हनीडोह थाना में एफ आई आर दर्ज कराया गया। बम्हनीडीह पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी और परीक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चाम्पा के समक्ष चालान पेश किया, जहां से साल 2020 में सभी को दोष मुक्त कर दिया गया था। शासन ने इस मामले की अपील की और द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश गणेश राम पटेल ने मामले मे 29 जनवरी को अहम फैसला सुनाया।
इन्हें पाया गया दोषी-छात्रा पोरा बाई, केंद्राध्यक्ष फूल साय वृसिंह, प्राचार्य एस एल जाटव और दीपक जाटव को दस्तावेज मे हेराफेरी और गड़बड़ी करने के मामले में दोषी पाया। ज्यायाधीश ने पेराबाई, फूलसाय नृसिंह, एस एल जाटव और दीपक जाटव को धारा 420, 467, 468, 471, 120बी के लिए पांच-पांच वर्ष कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपए अर्थदण्ड से दंडित किया है।
कोर्ट की ऐसी टिप्पणी-इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि आरोपियों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर के विरुद्ध ही अपराध कारित नहीं किया है. बल्कि उन छात्रों के खिलाफ भी अपराध किया है. जो अपने भविष्य के लिए कड़ी नेहनत करते हैं।

RO No. 13467/10