
रांची, ११ जनवरी ।
झारखंड में गरीबों को एक रुपये प्रति किलो चना दाल उपलब्ध कराने को लेकर जारी टेंडर दलालों के चंगुल में फंसकर पूरी तरह से उलझ गई है। फैसला नहीं होने के कारण अभी तक दाल आपूर्ति के लिए किसी कंपनी को टेंडर नहीं मिला है। टेंडर में जिन दो कंपनियों को एल-1 एवं एल-2 की उपलब्धि हासिल हुई उन पर गंभीर आरोप हैं। दोनों कंपनियों ने केंद्रीय उपक्रमो के कैटलाग के आंकड़ों को चोरी कर टेंडर पेपर भरा और इसकी पुष्टि पेपर भरने के समय एवं कैटलॉग के नम्बर से होती है। वी केयर सीड्स ने केंद्रीय उपक्रम के कैटलाग को चोरी से इस्तेमाल किया। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं कर कंपनियों का चयन कर लिया गया। वी केयर सीड्स ने 160.46 करोड़ रुपये में चना दाल आपूर्ति के लिए टेंडर भरा। जबकि आनंदेश्वर एग्रो फूड प्राइवेट लिमिटेड ने 160.65 करोड़ रुपये की दर कोट की। इस कारण से वी केयर को एल-1 का दर्जा मिला।27 सितंबर 2025 को जारी टेंडर के बाद इस प्रक्रिया में कुल 15 कंपनियों ने भाग लिया था। इनमें दों केंद्रीय उपक्रम भी थे। सेंट्रल गवर्नमेंट इम्प्लाइज कंज्यूमर कोपरेशन सोसाइटी लिमिटेड और एनसीसीएफ आफ इंडिया लिमिटेड नामक केंद्रीय उपक्रमों के आंकड़े दो अन्य कंपनियों के टेंडर के साथ अटैच्ड थे।दोनों केंद्रीय उपक्रमों ने अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं की है। लेकिन पकड़े जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना भी संदेह को जन्म देता है।दाल के लिए निविदा समिति में वित्त विभाग एवं निगरानी विभाग के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। बावजूद इसके निविदा निष्पादित किया जाना कई सवाल खड़े करता है ।टेंडर के माध्यम से एल-1 घोषित कंपनी वी केयर सीेड्स ने गलत तरीके से चोरी का कैटलाग (नंबर – 6363552859) इस्तेमाल किया लेकिन प्राथमिकी दर्ज कराने की बजाय इसे इसे एस वन घोषित कर दिया गया।नियमानुसार कोई कंपनी अगर दूसरी कंपनी का कैटलाग चोरी कर इस्तेमाल करती है तो इसके आधार पर एफआईआर होनी चाहिए। चना दाल आपूर्ति के लिए चयनित एजेंसी वी केयर सीड्स ने भारत सरकार की कंपनी एनसीसीएफ के कैटलाग को चोरी कर दर कोट किया। दोनों कंपनियों का कैटलाग नंबर एक ही है। इसका खुलासा वेबसाइट पर दर्ज समय से ही हो जाता है। एनसीसीएफ ने जहां 21 नवंबर की शाम 5.08 बजे टेंडर भर दिया था वहीं वी केयर सीड्स ने 5.51 पर टेंडर भरा। ऊपर से दूसरी कंपनी के कैटलाग को गलत तरीके से अपना बताकर अटैच किया।
टेंडर पेपर भरने के क्रम में दोनों कंपनियों के बीच 43 मिनट से अधिक का अंतर है।इंटरनेट मीडिया पर वी केयर सीड्स के मालिक पर एक हजार करोड़ रुपये के आयकर चोरी के मामले में भी पूछताछ होने की सूचना है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। इस कंपनी को नियमविरुद्ध ईएमडी से छूट भी दी गई है। इसके लिए नियमानुसार कंपनी का झारखंड में निबंधन होना अनिवार्य होता है। कंपनी झारखंड में निबंधित नहीं है। एमएसएमई में इस कंपनी का नाम भी नहीं है।2. आनंदेश्वर एग्रो फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पाइज कंज्यूमर कोआपरेशन सोसाइटी के कैटलाग (नंबर -58770170785) का इस्तेमाल कर टेंडर प्रक्रिया में एल-2 पर पहुंच बना ली। 3. बड़ी बात यह है कि कुल पंद्रह कंपनियों में से तेरह कंपनियों को अयोग्य घोषित करते हुए सिफऱ् वैसी कंपनियों को योग्य घोषित किया गया जिसने चोरी की कैटलॉग से टेंडर पेपर भरा।यहां तक कि जिन दो भारत सरकार की कंपनियों का कैटलॉग चोरी कर इनके द्वारा टेंडर भरा गया उन्हें अयोग्य घोषित करते हुए विशेष रूप से पूर्व निर्धारित इन दो कंपनियों को योग्य घोषित किया ताकि मनमाने तरीक़े से टेंडर का फैसला किया जा सके।


























