
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में मंगलवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस समझौते की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से की।उन्होंने कहा कि यह समझौता तीन कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक है। यह पंजाब व देश के किसानों की बर्बादी का समझौता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस व्यापार समझौते के कारण देश या पंजाब का किसान अमेरिका के किसानों का मुकाबला नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व गुरु बनने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब वे चेला बनकर रह गए हैं। पारित प्रस्ताव में पंजाब की कृषि पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताते हुए समझौते को रद करने की मांग की गई। इस दौरान भाजपा के दोनों विधायक सदन में उपस्थित नहीं थे। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने भी निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि अमेरिका के साथ समझौते की जानकारी न तो संसद को दी गई और न ही किसी राज्य के साथ साझा की गई। न लोकसभा की स्टैंडिंग कमेटी से कोई सलाह ली गई और न ही सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि अमेरिका के किसानों के पास औसत 500 एकड़ जमीन है, जबकि हमारे सबसे बड़े किसान के पास भी 30 एकड़ जमीन होती है।
अमेरिका के किसान अमीर हैं और उन्हें अधिक सब्सिडी मिलती है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अमेरिका से सस्ता सोयाबीन और मक्का आने पर हमारे फीड बनाने वालों का कारोबार खत्म हो जाएगा।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने आई थी, उसी तरह अमेरिकी भारतीय बाजार पर कब्जा कर लेंगे। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जाने वाले बीज कानून पर भी चिंता जताई, जिसमें किसानों के पास अपना बीज रखने का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह छोटे भारतीय बीज उत्पादकों के लिए चिंता का विषय है।
एपस्टीन फाइल का जिक्र किए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका के हाथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कौन सी कमजोरी आ गई है, जिससे ऐसा लग रहा है कि ऐसा लगता है कि व्हाइट हाउस से ही देश चल रहा है।

















