चिरमिरी में कांग्रेस संगठन की जमीनी हकीकत पर सवाल

कोरिया बैकुंठपुर। हालिया सामने आई एक तस्वीर ने चिरमिरी की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। तस्वीर में नवनियुक्त युवा ब्लॉक अध्यक्ष की मौजूदगी तो दिखती है, लेकिन उनके साथ खड़े चेहरे ज़्यादातर रिटायर्ड उम्र के नेताओं के प्रतीत होते हैं। तस्वीर में बैकुंठपुर की पूर्व विधायक की उपस्थिति भी नजर आती है, परंतु जिस युवा नेतृत्व की बात कांग्रेस संगठन लंबे समय से करता रहा है, उसकी झलक इस दृश्य में कम ही दिखाई देती है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या चिरमिरी में कांग्रेस आज भी ‘रिटायर्ड अंकिलों’ के भरोसे ही चल रही है?
बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम शहरी क्षेत्र में मनरेगा को ‘बचाने’ के नाम पर किए गए एक जुटान का है। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि इस जुटान में न तो अपेक्षित संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे और न ही आम नागरिकों की खास भागीदारी देखने को मिली। खबरों की मानें तो नवनियुक्त ब्लॉक अध्यक्ष लगातार प्रयास कर रहे हैं, बावजूद इसके बुलाए जाने के बाद भी लोग कार्यक्रमों में जुट नहीं रहे। यह स्थिति संगठन की अंदरूनी कमजोरी की ओर इशारा करती है। चिरमिरी की राजनीतिक तासीर हमेशा से थोड़ी अलग रही है। यहां सिफारिश और दबाव की राजनीति को अक्सर आत्मसम्मान के खिलाफ माना जाता है। आम कार्यकर्ता हो या आम नागरिक, यहां अपनी बात रखने और फैसले लेने में स्वाभिमान को सबसे ऊपर रखा जाता है। शायद यही कारण है कि ऊपर से थोपे गए निर्णय या चेहरे यहां आसानी से स्वीकार नहीं किए जाते। यही आत्मसम्मान की भावना चिरमिरी को अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती है। इसके उलट, मनेंद्रगढ़ की कांग्रेस इकाई को लेकर अक्सर यह तंज कसा जाता है कि वहां यह आत्मसम्मान दिखाई नहीं देता। सवाल उठता है कि जो लोग लगातार 32 वर्षों तक एक ही नेत्री को अध्यक्ष प्रत्याशी के रूप में स्वीकार करते रहे, वे बदलाव और नए नेतृत्व की बात कैसे करेंगे? क्या यह मजबूरी है, आदत है या फिर विकल्पों की कमी? यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। कांग्रेस संगठन में युवा नेतृत्व को आगे लाने की बात तो होती है, लेकिन व्यवहार में वही पुराने चेहरे, वही पुरानी रणनीतियां और वही सीमित दायरा नजर आता है। नवनियुक्त युवा ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को एक सकारात्मक कदम माना जा सकता है, परंतु जब तक संगठन की सोच और कार्यशैली में बदलाव नहीं आता, तब तक केवल चेहरे बदलने से परिणाम बदलेंगे, इसमें संदेह है।
चिरमिरी की जनता अब केवल नारों और तस्वीरों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। यहां के लोग मुद्दों पर बात चाहते हैं, ठोस काम चाहते हैं और सम्मानजनक संवाद चाहते हैं। यदि कांग्रेस वास्तव में यहां अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, तो उसे रिटायर्ड नेताओं के सहारे से आगे बढक़र जमीनी कार्यकर्ताओं और युवाओं को वास्तविक भूमिका देनी होगी।

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