
कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिले में इन दिनों सांसद प्रतिनिधियों की भूमिका और कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठते जा रहे हैं। कोरबा संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद के द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र में ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा पूर्व विधायकों को सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। उद्देश्य स्पष्ट रूप से संगठन को मजबूत करना और प्रशासनिक कार्यों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाना बताया जाता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो सांसद द्वारा विभिन्न स्तरों पर प्रतिनिधियों को अवसर देना एक सराहनीय पहल मानी जा सकती है। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे कुछ अलग दिखाई दे रही है। जिले में स्थिति यह बन गई है कि जहां नजर डालें, वहीं कोई न कोई सांसद प्रतिनिधि दिखाई देता है। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत—हर स्तर पर सांसद प्रतिनिधियों की मौजूदगी है। इसके बावजूद क्षेत्र की आम जनता का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों की शिकायत है कि चाहे सडक़, बिजली, पानी, आवास, पेंशन या अन्य जनहित से जुड़े कार्य हों, कहीं भी ठोस प्रगति नजर नहीं आती। आम आदमी को यह महसूस होने लगा है कि प्रतिनिधियों की संख्या बढऩे के बावजूद काम ठप पड़े हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सांसद प्रतिनिधि केवल पद और पहचान तक सीमित रह गए हैं। जनता से संवाद कम होता जा रहा है और समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने में भी गंभीरता नहीं दिखाई दे रही। इससे आमजन में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि भविष्य में भी हालात सुधरने की कोई स्पष्ट उम्मीद नजर नहीं आ रही है। वहीं, सांसद द्वारा पूर्व विधायकों को सांसद प्रतिनिधि बनाए जाने को लेकर भी कांग्रेस संगठन के भीतर से सवाल उठ रहे हैं। कुछ वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूर्व विधायक अपने आप में एक सशक्त और प्रभावशाली राजनीतिक पद होता है। ऐसे में उन्हें सांसद प्रतिनिधि बनाए जाने से संगठन के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले लोगों को यदि अवसर नहीं मिलेगा, तो उनका मनोबल टूटना स्वाभाविक है। कांग्रेस के अंदरखाने यह चर्चा भी तेज है कि सांसद प्रतिनिधियों के इर्द-गिर्द ही सारी गतिविधियां सिमटती जा रही हैं। इससे न केवल अन्य कार्यकर्ता बल्कि आम जनमानस भी सांसद से दूरी महसूस करने लगा है। जनता का सीधा संपर्क सांसद तक कम होता जा रहा है, जिसका सीधा असर राजनीतिक विश्वास पर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस असंतोष को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले चुनावों में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है। सांसद प्रतिनिधियों की संख्या भले ही अधिक हो, लेकिन यदि उनकी लोकप्रियता और कार्यक्षमता पर सवाल उठते रहे, तो यह स्थिति सांसद और पार्टी दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। कुल मिलाकर, कोरिया जिले में सांसद प्रतिनिधियों को लेकर उठ रहे ये सवाल आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।


















