
चाम्पा। नगर का ऐतिहासिक रामबांधा ही तालाब करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू क बहा रहा है। कभी यह 97 एकड़ में को, फैला स्वस्च्छ सुन्दर व विशाल के तालाब था। बाद में अतिक्रमण के कारण यह सिकुड़ गया। वहीं गंदगी व जलकुंभी ने रही सही कसर पूरी कर दी। अब यह तालाब पूरी तरह से बदहाल हो चला है।
लोगों में उम्मीद जगी की रामबांधा तालाब के दिन लौटेंगे। आईडीएसएमटी के तहत किये कार्यों में मिट्टी बाहर नहीं की गई बल्कि तालाब के पूर्व दिशा को पाट कर दो लाईन की एक किमी लम्बी सडक़, गार्डन व आवासीय परिसर के लिए भूमि बना लिया गया। करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्से को पाट कर तालाब को छोटा कर दिया गया। कालान्तर में पुष्पवाटिका, नगर पालिका भवन, बस स्टैण्ड,यांत्रिकी विभाग आदि बनाये गये जिसका समय समय पर विरोध भी किया जाता रहा है। कुछ मामले न्यायालय में भी गये, लेकिन प्रशासन पर इसका असर नहीं पड़ा। शेष बचे तालाब में कुड़े कचड़े व जलकुंभी का कब्जा है।
जलकुंभी के कारण तालाब मैदान की तरह दिख रहा है। घने जलकुंभी के फैलाव से पानी देख पाना मुश्किल है। तालाब की ओर अब किसी का ध्यान नहीं है। नगर पालिका मछली पालन के लिए ठेका देकर तालाब को केवल आय का साधन ही बना रखी है। गंदगी व दूषित पानी से जहां बीमारी फैलने की आशंका को बल मिल रहा है वही मच्छर पनप रहे है जिसके कारण तालाब के किनारे रहने वालों का बुरा हाल है।

















