
नईदिल्ली, 06 अगस्त
आरबीआई ने रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की है। इससे पहले लगातार 3 बार आरबीआई ने रेपो रेट घटाई थी। इस बार रेपो रेट को 5.5 फीसदी पर ही बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि जिन लोगों ने लोन ले रखा है, उनकी श्वरूढ्ढ भी नहीं घटेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि आमतौर पर आरबीआई के रेपो रेट घटाने पर ही बैंक लोन दरों में कटौती करते हैं जिससे श्वरूढ्ढ भी कम हो जाती है। रेपो रेट वो दर होती है, जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को लोन देता है। ये लोन छोटी अवधि के लिए होते हैं। क्रक्चढ्ढ ने नीतिगत रुख तटस्थ रखा है। आरबीआई गवर्नर ने अपने संबोधन में कहा कि कोर मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर है, जबकि ग्रामीण उपभोग अस्थिर है। वित्त वर्ष 26 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति (खुदरा महंगाई) 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 27 के लिए खुदरा महंगाई 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि चालू वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कंम हो गई हैं, लेकिन टैरिफ से वैश्विक व्यापार पर दबाव बना हुआ है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आरबीआई एमपीसी बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए कहा, पहली तिमाही में मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट और बढ़ गया है।
उन्होंने आगे कहा, पिछली एमपीसी बैठक के बाद से सिस्टम लिक्विडिटी सरप्लस में रही है । यह पिछले दो महीनों के दौरान 1.6 लाख करोड़ रुपये प्रतिदिन की औसत सिस्टम लिक्विडिटी के उलट है। उन्होंने आगे कहा कि पिछली बैठक के बाद घोषित 100 सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) में कटौती से लिक्विडिटी की स्थिति में और सुधार होगा।













