दिल्ली में अब प्लास्टिक से बनेंगी सडक़ें, दो साल और बढ़ जाएगी उम्र, जल्दी टूटने की समस्या से मिलेगी निजात

नईदिल्ली, २२ अप्रैल ।
सडक़ें बनाए जाने के बाद ज्यादा दिनों तक चलें, इसे देखते हुए दिल्ली में प्लास्टिक वाली सडक़ों का दौर शुरू होने वाला है, इससे दिल्ली में सडक़ों की उम्र दो साल और बढ़ सकेगी। ऐसे में दिल्ली में सडक़ों के जल्द टूट जाने की समस्या से निजात मिल जाने की संभावना है। दिल्ली में प्लास्टिक मिक्स सामग्री की सडक़ बनाने के लिए दिल्ली सरकार सीआरआरआई (केंद्रीय सडक़ अनुसंधान संगठन) से मदद लेने पर विचार कर रही है।सीआरआरआई भी मदद देने को तैयार है, जल्द ही दोनों के बीच बैठक होने की संभावना है। कुछ साल पहले सीआरआरआई ने प्रयोग के तौर पर दिल्ली कैंट में इस तरीके की सडक़ का किया निर्माण किया था, जिसके परिणाम बेहतर आए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्लास्टिक के इस्तेमाल से सडक़ों की उम्र कम से कम दो साल और बढ़ जाएगी। एक किलोमीटर सडक़ बनाने में एक टन तक प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया जा सकता है।इससे प्लास्टिक कचरे का भी निपटान हो सकेगा।दिल्ली में भाजपा की सरकार आने के बाद से प्रशासनिक स्तर पर तमाम तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं। बदलाव कामकाज के तौर तरीके तरीकों और नई-नई तकनीक के प्रयोग करने के भी सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में अगर सडक़ों की बात करें तो इस क्षेत्र में दिल्ली में एक बड़ा प्रयोग होने की संभावना है।
दिल्ली सरकार सडक़ों की दशा को लेकर चिंतित है जो पिछले 10 साल में अक्सर खराब ही रही हैं। इस समस्या से जनता को सबसे ज्यादा जूझना पड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार अब सडक़ों की मजबूती और लंबे समय तक चलने वाली सडक़ बनाने की रणनीति के तहत प्लास्टिक वाली सडक़ों पर विचार कर रही है। सीआरआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार सडक़ बनाने की कोलतार व रोड़ी मिक्स सामग्री में प्लास्टिक के उस कचरे को शामिल किया जाता है जो बेकार हो चुकी प्लास्टिक की वस्तुओं को मशीनों द्वारा काट कर छोटे छोटे टुकड़़ों में तैयार किया जाता है। मानक के अनुसार 1 किलोमीटर सडक़ बनाने में लगभग एक टन तक ऐसा कचरा उपयोग किया जा सकता है। वैज्ञानिकों की मानें तो मिक्स सामग्री में प्लास्टिक के कचरे के डाले जाने से सडक़ में मजबूती आती है और सडक़ जल्द खराब होने से बचती है।इस तरह की सडक़ें बरसात के समय भी जल्द खराब नहीं होती हैं।सडक़ों की उम्र दो साल तक बढ़ाई जा सकती है यानी जो सडक़ पांच साल तक चलती है उसे सात साल तक बचाया जा सकता है। मिक्स सामग्री में प्लास्टिक कचरा डालने से बहुत मामली खर्च बढ़ता है।प्लास्टिक कचरा मिक्स सडक़ें बनाने का प्रयोग कुछ साल पहले दिल्ली में कैंट एरिया में किया गया था। जहां सदर बाजार रोड को बनाया गया था, जो आज तक अच्छी हालत में है। इससे पहले भी कुछ स्थानों पर इसका प्रयोग किया गया था, जो सफल रहा है।

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