
जांजगीर। ग्राम टुण्डरा वार्ड 15 में इन दिनों भक्ति का उत्सव लगातार जारी है। स्थानीय साहू परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक माहौल से भर दिया है। टुण्डरा सहित आसपास के गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा में पहुंच रहे हैं। ओडिशा के कोमना से आए सुप्रसिद्ध कथा वाचक कान्हा महाराज भक्तों को अध्यात्म से जोड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वोच्च कला है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं प्रेम, धैर्य और निस्वार्थ भक्ति का संदेश देती हैं। इन लीलाओं का श्रवण करने से मन की अशांति दूर होती है और आध्यात्मिक शांति मिलती है। कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से प्रभु इच्छा तक चल रही है।
विशेष बात यह है कि बुजुर्गों के साथ युवा और बच्चे भी बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। भजन-कीर्तन की धुन और भगवान के नाम की गूंज से पंडाल भक्तिमय हो रहा है। कई बार श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगते हैं, जिससे उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। शुक्रवार 13 मार्च को कथा में महारास, मथुरा गमन और रुक्मणी विवाह के प्रसंगों का सजीव वर्णन हुआ।
भगवान कृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने गुलाल उड़ाकर खुशी जताई और मंगल गीत गाए। फूलों की वर्षा के बीच पूरा पंडाल राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। मुख्य यजमान रमेश कुमार साहू और शांति देवी साहू ने बताया कि शनिवार को कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से पहुंचकर कथा श्रवण करने और प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।












