
समझाईश देकर कराया काम : डीएफओ
कोरबा। केंद्रीय वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग से अनुमति लेकर हर साल फारेस्ट कूप कटाई करता है। कुछ कारणों से लगातार इस मामले में समस्या हो रही है। कोरबा के मदनपुर कोल्गा के बाद कटघोरा वनमंडल के जटगा रेंज में कूप कटाई को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हुई। लोगों ने दबाव बनाते हुए कामकाज को रूकवा दिया। डीएफओ ने बताया कि जानकारी मिलने पर लोगों को समझाईश दी गई और फिर काम संपन्न कराया।
कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत जटगा रेंज में विभाग ने कूप कटाई का काम इस वर्ष हाथ में लिया। उक्तानुसार अनुपयोगी और मृतप्राय वृक्षों को चिन्हित करने के साथ सूची तैयार की गई। इसे प्रक्रिया में शामिल करते हुए उपर भिजवाया गया। अनुमति प्राप्त होने पर कूप कटिंग शुरू कराई गई। खबर के अनुसार रेंज में बड़ा हिस्सा इसमें शामिल किया गया जहां पर संबंधित श्रेणी के सैकड़ों पेड़ शामिल थे। जंगल की बेहतरी के लिए इस तरह का काम हर वर्ष करना ही होता है। उद्देश्य यह है कि बीमार पेड़ों के कारण स्वस्थ पेड़ चपेट में न आने पाएं और उनका संरक्षण हो सके। जबकि अनुपयोगी पेड़ों की कटाई के साथ उनका व्यवसायिक उपयोग किया जाता है। इस वर्ष कूप कटिंग शुरू होने के कुछ समय बाद एक-दो स्थानों पर आसपास के ग्रामीणों ने मामले को लेकर विरोध दर्ज कराया। लोगों का कहना था कि व्यवस्था के अंतर्गत अनुपयोगी पेड़ों की कटाई कोई मसला नहीं है। उनका आरोप था कि इसकी आड़ में हरे-भरे पेड़ों की बलि दी जा रही है और जंगल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इससे हमारी आजीविका प्रभावित होगी। लोगों के बढ़ते दबाव पर क्षेत्र में इस काम को रोकना पड़ा।
वहीं कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने इस विषय को लेकर बताया कि जटगा रेंज में कूप कटिंग के काम में व्यवधान होने की सूचना पहुंची थी। लोगों के इस बारे में अपने तर्क थे। मौके पर अधिकारियों को भिजवाया गया। उन्होंने मामले को समझा और लोगों से बातचीत की। उन्हें बताया गया कि कूप कटिंग क्या है और यह किस तरीके से की जा रही है। उनकी आशंकाओं को पूरे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दूर किया गया। डीएफओ ने कहा कि सभी चीजें स्पष्ट करने के साथ कामकाज को कम्प्लीट कराया जा रहा है। अब कोई दिक्कत नहीं है।
50 लोगों पर मामला दर्ज
इससे पहले वन मंडल कोरबा के अंतर्गत मदनपुर कोलगा में कूप कटिंग को लेकर आसपास के तीन गांव के लोगों का वन विभाग के साथ जमकर टकराव हुआ। उन्होंने कोलगा गुफा और आसपास के जंगल को नुकसान पहुंचाने एवं भविष्य में कोयला खदान को खोलने का रास्ता साफ करने का आरोप लगाते हुए कटिंग में लगे संसाधन को जप्त कर लिया था। विवाद बढ़ाने की स्थिति में कटिंग रोखनी पड़ी हालांकि बाद में फॉरेस्ट की ओर से इस बारे में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। लगभग 50 लोगों के खिलाफ मामले कायम किए गए, जिस पर लोगों ने जिला प्रशासन के पास पहुंचकर हाल में ही आपत्ति दर्ज कराई। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को अनुचित करार दिया। उनका साफतौर पर आरोप है कि मामला ग्रामीण क्षेत्र का है और पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्र से संबंधित। ऐसे में ग्रामसभा की शक्तियों का ध्यान नहीं रखा गया। बिना किसी प्रस्ताव के इस तरह के काम कराए जा रहे हैं। याद रहे दो वर्ष पहले कोल्गा मदनपुर क्षेत्र में सीएमपीडीआई के सर्वेक्षण को लेकर भी ग्रामीणों ने मोर्चा खोला था।
























