
नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने के लिए चीन जैसे देशों पर प्रतिबंध लगाने के गंभीर परिणाम होंगे। उनकी यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की पृष्ठभूमि में आई है। इसमें रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी शामिल है। रूबियो ने फाक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा, चीन रूस से जो तेल खरीद रहा है, उसे परिष्कृत करता है और फिर उसे वैश्विक बाजार में बेच देता है। चीन जा रहे और परिष्कृत हो रहे तेल पर गौर कीजिए। उसमें से बहुत सारा तेल वापस यूरोप को बेचा जा रहा है।
यूरोप अब भी प्राकृतिक गैस खरीद रहा है। अब कुछ देश ऐसे हैं जो इससे दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, यूरोप अपने प्रतिबंधों के संबंध में और भी बहुत कुछ कर सकता है। यदि चीन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो जो कोई भी देश उससे तेल खरीदता है, उसे अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी या कोई वैकल्पिक बाजार ढूंढना पड़ेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री से पूछा गया था कि क्या रूसी तेल खरीदने के लिए यूरोप पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि अमेरिकी सीनेट में एक विधेयक है, जिसमें रूसी तेल खरीदने के लिए चीन और भारत पर सौ प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। कई यूरोपीय देश इस बारे में चिंतित हैं कि इसका क्या मतलब हो सकता है।