कुछ लोग ठाकरे का नाम मिटाने की ताक में मंसूबे सफल नहीं होंगे: प्रमुख उद्धव ठाकरे

मुंबई, २४ जनवरी ।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में हार का सामना करने के कुछ दिनों बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यह सोच रही है कि वह उनकी पार्टी को खत्म कर सकती है, तो यह उसकी बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) केवल एक राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है। अपने पिता और शिवसेना (अविभाजित) के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की जन्मशती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कई लोग ठाकरे नाम को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हो पाएगा।
उद्धव से पहले मंच पर बोलते हुए उनके चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि राज्य की राजनीतिक स्थिति गुलामों के बाजार जैसी है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम समेत हाल के निकाय चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य में नीलामी चल रही है। उद्धव ने कहा, अगर भाजपा यह सोचती है कि वह शिवसेना (यूबीटी) को खत्म कर देगी, तो वह गलत है। शिवसेना (यूबीटी) कोई पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर शिवसेना नहीं होती, तो भाजपा कभी भी बीएमसी या राज्य सरकार के मुख्यालय मंत्रालय के अंदर तक नहीं पहुंच पाती।
उनकी यह टिप्पणी 15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनाव के बाद आई है। इन चुनावों में भाजपा ने 227 में से 89 सीट पर जीत दर्ज की और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (29 सीट) के साथ गठबंधन में भाजपा ने देश की सबसे अमीर नगर निगम पर ठाकरे परिवार का दशकों पुराना नियंत्रण खत्म कर दिया। बीएमसी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी)-मनसे गठबंधन ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन वह भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बहुमत हासिल करने से नहीं रोक सका। शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि राज ठाकरे की मनसे को छह सीटें मिलीं।

 

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