
कोरबा। लेबर कोड में परिवर्तन सहित कई मुद्दों को लेकर ट्रेड यूनियनों की आज आह्वान्वित देशव्यापी हड़ताल औद्योगिक जिले कोरबा में रही। जिले के कोल सेक्टर में इसका मिश्रित असर देखा गया। बिजली सेक्टर में बिना किसी दिक्कत के अधिकारियों-कर्मचारियों और कामगारों ने काम करने में भरपूर रूचि ली। जबकि एल्यूमिनियम सहित दूसरे उद्योगों में सामान्य असर रहा। हड़ताल का समर्थन कुछ संगठनों ने किया था। हड़ताल के मामले में प्रबंधन और यूनियनों ने उपस्थिति को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं। हालांकि हड़ताल निपटने के बाद उत्पादन के ग्राफ स्पष्ट होने पर सही जानकारी सामने आ सकेगी।
मजदूरों के बीच उद्योग जगत में काम करने वाले ट्रेड यूनियनों ने कुछ महीने पहले देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। ऑपरेशन सिंदूर के कारण इसे टाल दिया गया। नई तारीख में 12 फरवरी का दिन चुना गया। पहले की तरह इस बार भी मुद्दे वही थी, जिनमें 44 श्रम कानूनों के स्थान पर 4 कानून बनाने और इन पर क्रियान्वयन करने की बात कही गई। ट्रेड यूनियन केंद्र सरकार की इस नीति से नाराज है। उनका कहना है कि नियमों में अप्रत्याशित बदलाव करने से कार्यस्थल पर प्रबंधन सहित ठेकेदारों की तूती बोलेगी। इसके ठीक उल्टे मजदूरों का शोषण होगा। फैक्ट्री एक्ट को प्रभावशील करने के मामले में जो नियम तय किए गए हैं उसे भी मजदूरों के लिए हानिकारक और प्रबंधन के लिए हद से ज्याद लाभकारी बताए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बड़े औद्योगिक जिले कोरबा में ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को लेकर लगातार यहां-वहां अभियान चलाए गए। कन्वेंशन में भी बात हुई। समर्थन जुटाए गए। नतीजा यह रहा कि कोल सेक्टर में हड़ताल को मिश्रित सफलता मिली।
आउटसोर्सिंग वाले कामकाज बेहतर तरीके से चलने की खबर है। एसईसीएल कुसमुंडा, कोरबा, गेवरा और दीपका विस्तार की कोयला खदानों में नियमित कामगारों की उपस्थिति उस मामले में कुछ कम रही जो संगठन विशेष से जुड़े हुए हैं। जबकि हड़ताल से बाहर भारतीय कोयला खदान मजदूर संगठन के आह्वान पर उसके समर्थक कामगारों ने इस हिसाब से काम लिया। कोयला खदानों में समर्थक संगठनों के लोगों ने सुबह नारेबाजी की। उन्होंने खुद कामकाज से दूरी बनाई और दूसरों को भी मौके पर जाने से रोका। टकराव की स्थिति को रोकने के लिए यहां-वहां पुलिस और सुरक्षा बल ड्यूटी करता रहा।
कोरबा जिले में ही हड़ताल की दूसरी तस्वीर पॉवर सेक्टर में देखने को मिली। एनटीपीसी की 2600 मेगावाट वाली विद्युत परियोजना सहित 1200 मेगावाट की बालको, 1300 मेगावाट की एचटीपीएस, 500 मेगावाट की डीएसपीएम और 120 मेगावाट की हसदेव बांगो जल विद्युत परियोजना के अलावा 800 मेगावाट की अडाणी पॉवर और निजी क्षेत्र की दूसरी परियोजनाओं में सामान्य दिनों की तरह उत्पान जारी रहा। यहां की श्रमशक्ति ने इन कार्यों में अपना श्रम लगाया। जिले के दूसरे उद्योगों में भी कामकाज की गति कुछ ऐसी रही।
काली पट्टी के साथ विरोध और काम भी
गजब बात यह रही कि पॉवर सेक्टर में देशव्यापी हड़ताल को सिरे से खारिज कर दिया गया। इसके ठीक उल्टे कोरबा में बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने हड़ताल के मुद्दों को एक स्तर पर समर्थन भी दिया। विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने सब स्टेशन सहित अन्य क्षेत्रों में हड़ताल का संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने काली पट्टी लगाकर श्रम नीतियों का विरोध जरूर किया लेकिन वे काम पर भी रहे। यूनियन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि विद्युत हर किसी की आवश्यकता है। इसे आवश्यक सेवाओं में शामिल किया गया है इसलिए ड्यूटी करनी तो बनती है। चूंकि श्रम कानून के मामले बहुत सारे कर्मियों और असंगठित मजदूरों के हितों से जुड़े हैं इसलिए इनके प्रति भी हमारी प्रतिबद्धता है। ऐेसे में नीतिगत रूप से नवीन कानूनों का विरोध करना जायज है। यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा कि मजदूर हित में बात करना किसी भी दृष्टिकोण से गलत नहीं है। रहा सवाल हड़ताल का, तो यह लोकतांत्रित अधिकार है। वहीं स्थिति के आधार पर कर्मियों की भागीदारी इस तरह की हड़तालों में तय होती है।
कांग्रेसी उतरे माइंस में बंद कराया मशीनों को
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में कांग्रेस ने ट्रेड यूनियन की हड़ताल का समर्थन किया। उन्होंने गेवरा से झंडा-बैनर के साथ रैली निकाली और गेवरा खदान के रलिया ओबी सेक्टर में पहुंचकर का कार्यकर्ताओं ने कामकाज को बंद कराया जो पहले की तरह बेहतर ढंग से चल रहा था। बताया गया कि पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महामंत्री हरीश परसाई, महिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रभा तंवर, तनवीर अहमद, प्रशांति सिंह, हर्षित सिंह सहित अनेक पार्षद व कार्यकर्ताओं ने इंटक के साथ मिलकर अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मजदूर हित प्रभावित हो रहे हैं इसलिए हड़ताल के माध्यम से सरकार को सचेत किया जा रहा है। हरीश परसाई ने कहा कि खदान बंद कराने से कड़ा संदेश दिया जा सकता है इसलिए इस काम को किया गया।






















