
नई रोशनी दिखाने का माध्यम बनी शिक्षा नीति
कोरबा। भारत सरकार द्वारा नवीन शिक्षा नीति को क्रियान्वित करने के बहुत सारे परिणाम साफ तौर पर नजर आ रहे हैं। प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इसे महसूस किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि विद्यार्थियों को इतिहास के सही तथ्यों को जानने का मौका मिल रहा है और यह उन्हें मानसिक स्तर पर सशक्त बनाएगा।
जिले के शासकीय कॉलेज करतला में प्राचार्य मृगेश यादव ने आज तरूण छत्तीसगढ़ से बातचीत करते हुए कहा कि देखा जाए तो उच्च स्तर पर शिक्षा नीति को बहुत समय पहले बदल दिया जाना चाहिए था लेकिन देर से ही सही बेहतर काम हुआ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति के दूसरे पक्षों को इस रूप से देखा जाना चाहिए कि राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जो चीजें बहुत ज्यादा आवश्यक है, उनका समावेश पुस्तकों में होना चाहिए। महाविद्यालय में आने के साथ विद्यालयों को राजनैतिक और एतिहासिक और सामाजिक विषियों के संबंध में प्रमाणित जानकारी प्राप्त हो, ऐसी अपेक्षा तो होना ही चाहिए। कहना गलत नहीं होगा कि लंबे समय से विशेष तौर पर जो चीजें इतिहास का हिस्सा थी उनका औचित्य समझ से परे रहा। आवश्यकता इस बात की है कि भारत के सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ में विद्यार्थियों के लिए जरूरी क्या है, इसका ध्यान रखा जाए। श्री यादव ने कहा कि देश की संस्कृति, सभ्यता और यहां का गौरवगान जिन चीजों से हो सकता है, कम से कम उन पर फोकस हो। ऐसी मानसिकता को बहुत पहले हासिए पर किया जाना चाहिए था जो सोच को संकीर्ण बनाती है और प्रभावित करती है।
सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभा रहे श्री यादव ने कहा कि यही सब कारण है कि नवीन शिक्षा नीति में अपरिहार्य विषयवस्तु का समावेश किया गया है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को कम से कम भारत के गौरवशाली अतीत और स्वर्णिम वर्तमान के बारे में जानने का अवसर मिल रहा है।

















