
कोरबा। दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व जारी है। 10 लक्षणों पर यहां विचार मंथन के साथ संवाद हो रहा है। आर्यिका रत्न ने यहां लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मायारहित जीवन से सफलता मिलना सुनिश्चित है। जबकि कुटिलता जीवन को नकारात्मक बनाती है और व्यक्ति के मन में कई तरह की बुराईयों का समावेश कर देती है।
उन्होंने कहा कि हमें सदैव सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र का पालन करना चाहिए ।देव- शास्त्र -गुरु का स्मरण करने से उत्तम आर्जव धर्म का पालन होता है। यदि इन तीनों की प्रति समर्पित नहीं हुए,तो मन, वचन, काय की कुटिलता होगी और इसी कुटिलता को दूर करना सरलता का पालन करना ही उत्तम आर्जव है। इसके विपरीत मायाचारी होती है। व्यक्ति में धर्म, कर्म, व्यापार आदि ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां मायाचारी नहीं होती है। इस प्रकार से हमने धर्म को समझ तो लिया, जान तो लिया लेकिन इसके पालन करने पर ही उत्तम आर्जव धर्म का पालन होता है। इस प्रकार से जैन समाज मैं पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म को अच्छे ढंग से समझ कर अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। पर्यूषण पर्व में प्रात: से ही श्री जी का अभिषेक, शांति धारा एवं पूजन किया। सांस्कृतिक प्रभारी ने बताया कि अनंत चतुर्दशी तक पर्यूषण पर्व जारी रहेगा। इसके अंतर्गत कई प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों के लिए रखी गई है। जैन समाज ने तय किया है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी समापन विजेताओं को प्रोत्साहित करने पुरस्कार दिये जाएंगे।