गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, मार्च में लू की आहट, IMD ने बताई असली वजह

नईदिल्ली, २७ मार्च ।
इसे जलवायु परिवर्तन का असर कहें या साल दर साल बदलते मौसम का मिजाज…अब सर्दी और गर्मी के बीच संक्रमण का अहसास नहीं हो रहा है। बसंत ऋतु आ गई है, लेकिन हल्की ठंड का अहसास नहीं हो रहा है। इस साल तो आलम यह है कि मार्च में ही भीषण गर्मी का अहसास होने लगा है। बुधवार को दिल्ली में मार्च की गर्मी ने तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। पश्चिमी, दक्षिणी और मध्य भारत के साथ ही तटीय इलाकों में भी गर्मी का अहसास होने लगा है। कई राज्यों में दिन का तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच गया है। ऐसे में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की संभावना का अंदाजा विशेषज्ञ भी नहीं लगा पा रहे हैं। साफ आसमान और तेज धूप के बीच बुधवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 7.4 डिग्री अधिक 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे पहले मार्च 2022 में यह 39.6 डिग्री तक पहुंचा था। यानी बुधवार का तापमान तीन साल बाद सबसे ज्यादा रहा।दिल्ली का सबसे गर्म इलाका पीतमपुरा रहा। यहां का तापमान 40.6 डिग्री रहा। जबकि रिज का तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री अधिक 17.7 डिग्री दर्ज किया गया। राजघाट में सबसे अधिक न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री दर्ज किया गया। पीतमपुरा और रिज इलाके में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाने के बावजूद मौसम विभाग ने इसे हीट वेव की श्रेणी में नहीं रखा है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगर लगातार दो दिन तक ऐसी स्थिति बनी रहे, तो ही इसे हीट वेव की श्रेणी में रखा जाता है। जबकि गुरुवार को एक से दो डिग्री की गिरावट हो सकती है। हवा की गति बढऩे पर तापमान में और गिरावट आ सकती है।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में ला नीना के दौरान भीषण गर्मी और लंबी लू देखने को मिल सकती है। ला नीना प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान को ठंडा करके दुनिया के कई हिस्सों में ठंडक बढ़ाता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अब इसका असर कमजोर पड़ रहा है। आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण आने वाले समय में ला नीना गर्मी से राहत नहीं दे पाएगा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, वर्ष 2024 में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में ठंडे पानी का क्षेत्र कमजोर रहा। जबकि कुछ हिस्सों में पानी सामान्य से अधिक गर्म रहा। यह दर्शाता है कि ला नीना अब पहले की तरह प्रभावी नहीं है। इसलिए आने वाले वर्षों में गर्मी की अवधि बढ़ सकती है। लू लंबे समय तक चलेगी, मानसून भी प्रभावित हो सकता है, जिससे बारिश का पैटर्न बदल सकता है।मौसम विभाग के अनुसार, 2024 की गर्मियों में सबसे ज़्यादा दिन लू के रिकॉर्ड किए गए। 2024 इतिहास का सबसे गर्म साल रहा है। इस साल भी मार्च से ही गर्मी सामान्य से ज़्यादा रही है। अगर 2025 को 1901 के बाद सबसे गर्म साल कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मौसम को प्रभावित करने वाले पश्चिमी विक्षोभ कमजोर होते जा रहे हैं। इनकी संख्या सामान्य है, लेकिन इनका असर कम होता जा रहा है। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर भारी बर्फबारी वाले दिनों की संख्या भी कम होती जा रही है।पश्चिमी विक्षोभ के कारण आमतौर पर चक्रवाती हवा का क्षेत्र बनता है, लेकिन कमजोर विक्षोभ के कारण अब ऐसा ज्यादा नहीं हो रहा है।मजबूत चक्रवाती हवा का क्षेत्र न बनने के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश भी सामान्य से कम हो रही है। पहले सर्दी और गर्मी के बीच एक समय ऐसा होता था जब हल्की ठंड पड़ती थी। लोग बसंत ऋतु का आनंद लेते थे। लेकिन, पिछले कुछ सालों में बसंत ऋतु का समय कम होता जा रहा है। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक मौसमी घटनाएं जिम्मेदार हैं।-महेश पलावत, उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन), स्काईमेट वेदरहमने पहले ही बताया था कि इस साल मार्च से मई तक भीषण गर्मी पड़ेगी। देश के अन्य हिस्सों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। अप्रैल से उत्तर भारत में भी इसका असर दिखेगा।
इसके पीछे जलवायु परिवर्तन निश्चित रूप से एक बड़ा कारक है।-डॉ. एम. महापात्रा, महानिदेशक, मौसम विभाग

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