सरेंडर कर चुके माओवादी देवजी ने की माकपा- माओवादी से प्रतिबंध हटाने की मांग

नईदिल्ली, १५ मार्च ।
सरेंडर कर चुके माओवादी कमांडर थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने केंद्र सरकार से माकपा (माओवादी) पर लगे प्रतिबंध हटाने और इसे राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देने की शनिवार को मांग की। हालांकि संगठन चुनावी राजनीति में भाग लेने के पक्ष में नहीं है। देवजी ने हाल ही में तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।देवजी ने कहा, हमने मुख्यमंत्री (ए रेवंत रेड्डी) से हाल ही में हुई बैठक में अनुरोध किया कि वे इस मामले को (प्रतिबंध हटाने के बारे में) केंद्र के संज्ञान में लाएं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात की। उनका कहना है कि केवल सरकार के पास हथियार होने चाहिए, दूसरों के पास नहीं। हम भी कहते हैं कि अगर हमारी पार्टी को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाती है तो हम हथियार डाल देंगे।देवजी ने कहा केंद्र सरकार के माओवादी विरोधी ऑपरेशन कगार के शुरू होने के बाद कई माओवादियों की गिरफ्तारी, मारे जाने या आत्मसमर्पण के कारण माकपा (माओवादी) को भारी नुकसान हुआ। संगठन के लिए अस्तित्व बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। देवजी ने कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं होना चाहते, क्योंकि माकपा (माओवादी) राजनीतिक पार्टी है।देवजी ने देशभर में जेल में बंद माओवादी समर्थकों को राजनीतिक कैदी के रूप में मान्यता देकर रिहा करने की भी मांग की। इस बीच उन्होंने टीवी चैनल से कहा, हम संसद और विधानसभा चुनावों में भाग नहीं लेना चाहते। उन्होंने कहा, जब माओवादी सिस्टम को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया जाता है तो इससे माओवादी और सुरक्षा बलों दोनों को नुकसान होता है। उन्होंने आकसफैम जैसी संगठनों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि अभी भी धन कुछ ही लोगों के पास है। माओवाद के कमजोर होने के कारणों पर उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव के अनुसार कार्रवाई की योजना तैयार करने में देरी हुई। चार दशकों तक भूमिगत रहने के बाद देवजी ने 24 फरवरी को आत्मसमर्पण किया था। देवजी के साथ मल्लाराजी रेड्डी, बड़े चोक्का राव उर्फ जगन, और नूने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना ने भी हथियार डाल दिए थे। देवजी ने कहा, मौत के डर से नहीं, बल्कि कानूनी ढांचे में रहकर लोगों के लिए काम करने की खातिर आत्मसमर्पण किया है।
यह भी दावा किया कि तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने से पहले ही पुलिस ने उन्हें तथा अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। देवजी ने शुक्रवार को कहा था कि मौत का कभी डर नहीं था और अगर ऐसा होता तो वह पिछले साल अक्टूबर में माओवादी मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू और अशन्ना उर्फ सतीश की तरह आत्मसमर्पण कर देते।देवजी ने टीवी चैनलों से कहा, तेलंगाना पुलिस ने हमें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अगर वे चाहते तो हमें मार सकते थे। लेकिन उन्होंने हमसे कहा कि हत्या करना उनकी नीति नहीं है और वे आत्मसमर्पण करवाना चाहते थे लेकिन मैं आत्मसमर्पण करने को तैयार नहीं था। आईएएनएस के अनुसार, देवजी ने कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार पिछली सरकारों की तुलना में अपेक्षाकृत नरम प्रतीत होती है। उन्होंने कहा, हम कई बार कह चुके हैं कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। फिर खून-खराबे की क्या जरूरत है। देवजी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से ऑपरेशन कगार को रोकने की अपील भी की।
जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा के अनुसार इस महीने के अंत तक माओवाद को समाप्त किया जा सकता है, तो देवजी ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष को समाप्त करने से विचारधारा को मिटाया नहीं जा सकता है। इस बीच एएएनआइ के अनुसार पूर्व माओवादी राजिरेड्डी ने भी कहा कि उन्होंने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि उन्हें गिरफ्तार किया गया। राजिरेड्डी ने कहा, मैंने आत्मसमर्पण नहीं किया। मुझे 18 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।

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