
जांजगीर। जिले में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 की शुरुआत हो गई है। इस बार ग्रामीणों की राय को अहमियत दी जा रही है। सर्वे टीम गांव-गांव जाकर लोगों से फीडबैक ले रही है। बुधवार को पहले दिन टीम अकलतरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत परसाही बाना पहुंची। यहां 16 घरों में जाकर जानकारी जुटाई। साथ ही 5 सार्वजनिक स्थानों का निरीक्षण किया। टीम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने सभी कंपोनेंट की तस्वीरें लीं।
सफाई व्यवस्था, शौचालय की स्थिति और कचरा प्रबंधन पर लोगों से सवाल किए। टीम जिले के 20 गांवों में जाएगी। अगला सर्वे रैंडमली गांव में होगा। यह सर्वे केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। शहरों में होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण की तर्ज पर इसे तैयार किया गया है। इसका मकसद गांवों में सफाई की असल स्थिति जानना है। खुले में शौच से मुक्ति और ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति भी जांची जा रही है। इस बार ग्रामीणों की राय को 100 अंक का विशेष महत्व दिया गया है।
लखनऊ की एजेंसी गांव-गांव करेंगी सर्वे: राज्य में सर्वेक्षण कार्य के लिए भारत सरकार ने स्वतंत्र एजेंसी एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, लखनऊ को चुना है। यह एजेंसी फील्ड सर्वे शुरू करेगी। सर्वेक्षण में ग्राम पंचायतों की स्वच्छता और साफ-सफाई का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर ग्राम पंचायतों की रैंकिंग तय होगी। पंचायतों की रैंकिंग से जिले और राज्य की रैंकिंग राष्ट्रीय स्तर पर तय की जाएगी।
सर्वेक्षण में 1000 अंक तय ग्रामीण स्वच्छ सर्वेक्षण इस बार नए फॉर्मेट में होगा, जिसमें कुल 1000 अंक तय किए गए हैं। चार रैंकिंग पैटर्न के आधार पर गांवों का मूल्यांकन किया जाएगा। ओडीएफ प्लस मॉडल सत्यापित गांवों के डेस्कटॉप वेरिफिकेशन और प्रमुख मानकों पर जिलों की स्व-रिपोर्टिंग को 250 अंक मिलेंगे। घरों और गांवों के मूल्यांकन, सार्वजनिक स्थानों की स्थिति के लिए 540 अंक तय किए गए हैं। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन यूनिट, फीकल स्लज मैनेजमेंट, शहरी सुविधाओं से लिंक और गोवर्धन प्लांट के लिए 120 अंक मिलेंगे। मोबाइल ऐप और फील्ड सर्वे के जरिए फीडबैक डेटा संग्रह पर 100 अंक निर्धारित किए गए हैं। यह सर्वेक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी को बढ़ावा देने में मदद करेगा।























