दफ्तर में बाबू बने शिक्षकों को लौटना होगा स्कूल

कोरबा। वर्षों से ब्लैकबोर्ड और चॉक से दूर कई दफ्तरों में पदस्थ होकर केवल फाईलों के निपटारे में लगे और इसके एवज में मलाई खा रहे मूल शिक्षकों को उनके मूल स्कूल में भेजने की एक बार फिर कवायद शुरू हुई है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में गिरते शैक्षणिक स्तर और शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने प्रदेश के सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। डीपीआई द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी मूल पदस्थापना वाली शालाओं को छोडक़र विभिन्न कार्यालयों और संस्थाओं में बाबूगीरी या अन्य गैर-शिक्षकीय कार्यों में लगे हुए हैं। इससे न केवल प्रशासनिक अनुशासन बिगड़ रहा है, बल्कि स्कूलों में विद्यार्थियों का अध्यापन कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। आदेश के तहत अब ऐसे सभी शिक्षकों को उनकी मूल शालाओं में वापस भेजकर वहां उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। इस बार प्रशासन केवल आदेश जारी करके शांत नहीं बैठा है। डीपीआई ने सभी संबंधित अधिकारियों को 7 दिन के भीतर संलग्नीकरण समाप्त करने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी शिक्षक कागजों पर कार्यमुक्त होकर दोबारा पिछले दरवाजे से उसी दफ्तर में न लौट आए। यह आदेश 28 फरवरी 2024 को राज्य शासन द्वारा जारी उन निर्देशों की कड़ी में है, जिसमें कलेक्टरों और कमिश्नरों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों को वापस भेजने का आदेश जारी हुआ है। जानकारों का कहना है कि पूर्व में भी ऐसे आदेश निकले, लेकिन राजनैतिक रसूख या प्रशासनिक सांठगांठ के चलते शिक्षक कुछ दिनों बाद फिर से दफ्तरों में लौट आते हैं।ष्ठक्कढ्ढ का आदेश उपरांत सबकी नजरें जिला शिक्षा अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे अपने चहेते कर्मचारियों को मूल स्कूलों में भेजने के लिए कितनी सख्ती दिखाते हैं।

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