दरभंगा [एजेंसी]।विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है, टिकट के दावेदार भी खुलकर सामने आने लगे हैं। ऐसे तो दावेदारी से हर दल के सुप्रीमो परेशान हैं, लेकिन, सबसे अधिक दावेदारी राजद के कार्यकर्ता कर रहे हैं। इसमें कई ने अभी से बागी के रूप में तैयारी भी शुरू कर दी है। दरअसल, कई ने सामने वाले दिग्गज नेता को देख मान लिया है, उन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिलने वाला है। ऐसे में तेज प्रताप यादव के सहारे सामाजिक न्याय की चेतना जगाने के लिए क्षेत्र में जाने के लिए आतुर हैं। दरभंगा जिले के हायाघाट और कुशेश्वरस्थान सुरक्षित क्षेत्र में हाल के दिनों में तेज प्रताप यादव ने अपने समर्थकों के साथ रोड शो कर चुके हैं। हायाघाट क्षेत्र के उज्जैना में उन्होंने सभा को संबोधित कर अपने को दूसरा लालू प्रसाद यादव बताकर समर्थकों में जोश भर दिया है। बताया जाता है कि तेज प्रताप यादव के लिए अंदर ही अंदर कई बड़े नेता काम कर रहे हैं। जिनकी नजर सभी विधानसभा सीटों पर है।इसमें चुनाव लडऩे वाले नेताओं को जातीय समीकरण के तहत चिह्नित किया जा रहा है।कई ने तो दो कदम आगे बढक़र अपने क्षेत्र में तेज प्रताप का कार्यक्रम भी ले रहे हैं। कई नेताओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि समय नजदीक आने पर सब कुछ साफ हो जाएगा।हालांकि, इतना कहा कि वर्षों से पार्टी के खास लोग ही चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में नए कार्यकर्ताओं को मौका नहीं मिल रहा है। तेज प्रताप यादव से किसी नए कार्यकर्ताओं को बैर नहीं है। एक नेता ने कहा कि चुनाव लडऩा तो सभी का मौलिक अधिकार है। ऐसे में तेजस्वी और तेज प्रताप में कोई अंतर नहीं है।दोनों सामाजिक न्याय के पक्षधर हैं और एक ही परिवार के अलग-अलग दो फूल हैं। ऐसे में बताया जा रहा है कि कई ऐसे बागी तेजप्रताप के संपर्क में हैं, जो राजद और उसके प्रत्याशियों को झटका देने के लिए बेताब हैं।बता दें कि दरभंगा के 10 विधानसभा क्षेत्रों में 2020 के चुनाव में राजद ने जाले और बेनीपुर को छोडक़र आठ सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें मात्र एक सीट दरभंगा ग्रामीण से ललित कुमार यादव की जीत हुई थी।ऐसी स्थिति में राजद अपनी खोई हुई जमीन को वापस लेने के लिए जो तैयारी कर रही है उसमें तेज प्रताप फैक्टर की इंट्री महंगी साबित हो सकती है।
अफगानिस्तान से जाते वक्त अमेरिका छोड़ गया था हथियार अब पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा तालिबान
नई दिल्ली 24 अगस्त। पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा है कि वह अफगानिस्तान में छोड़े गए हथियार वापस ले। ये हथियार आतंकवादियों के हाथों में जा रहे हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। अफगानिस्तान से वापसी के दौरान बड़ी मात्रा में सैन्य हथियार वहीं छूट गए थे। पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि अमेरिकी हथियारों का अनियंत्रित प्रसार पाकिस्तान की स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन द्वारा अनुमानित सात अरब डॉलर से अधिक मूल्य के अमेरिकी हथियारों के भंडार में बख्तरबंद वाहन, उन्नत आग्नेयास्त्र, बायोमीट्रिक सिस्टम और अन्य संवेदनशील उपकरण शामिल हैं।माना जाता है कि इनमें से कई हथियार पाकिस्तानी तालिबान द्वारा जब्त कर लिए गए और अब पाकिस्तान सेना के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे हैं। खोस्त और पक्तिका जैसे अफगान के ब्लैक मार्केट में अमेरिका निर्मित हथियारों की कीमतें आसमान छू रही हैं। एक एम4 राइफल 4,200 डॉलर से अधिक में बिकती है, जबकि एक एम16 राइफल 1,400 डॉलर में बिकती है।
चीनी राइफलें कम दामों पर उपलब्ध हैं, लेकिन आतंकी अमेरिकी मॉडलों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को ज्यादा पसंद करते हैं। द वाशिंगटन पोस्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि नाटो द्वारा आपूर्ति किए गए 4,00,000 हथियार तालिबान के नियंत्रण में हो सकते हैं।
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