सभी तक पहुंचे नवीकरणीय ऊर्जा का लाभ,NGAअध्यक्ष ने किया सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान

बेलम, १८ नवंबर ।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बैरबाक ने सामाजिक न्याय और जलवायु कार्रवाई पर साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा का लाभ सभी तक पहुंचना चाहिए। ब्राजील के बेलम में संयुक्त राष्ट्र कांफ्रेस आफ पार्टीज (सीओपी-30) जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान सोमवार को बैरबाक ने सभी से एक-दूसरे पर विश्वास के साथ सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया। बैरबाक ने कहा, सामाजिक न्याय और जलवायु कार्रवाई एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
बैरबाक ने कहा कि पेरिस समझौते के 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं और नवीकरणीय ऊर्जा अजेय क्षेत्र बन गया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जलवायु संकट लगातार बढ़ता जा रहा है और पेरिस समझौते के लागू होने के बाद से वैश्विक कूटनीति में बहुत कम उपलब्धि हासिल हुई है।2015 के पेरिस समझौते का उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में पर्याप्त कमी लाना है ताकि वैश्विक तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखा जा सके। काप-30 सम्मेलन के लिए 190 से अधिक देशों के वार्ताकार जुटे हैं। ब्राजील के बेलम में 10 नवंबर से शुरू हुआ यह सम्मेलन 21 नवंबर तक चलेगा।केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव बेलम पहुंच गए हैं। सम्मेलन में वह क्लाइमेट फंङ्क्षडग समेत प्रमुख मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेंगे। भूपेंद्र यादव ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट किया, बेलम पहुंच गया हूं। अगले कुछ दिनों में, जलवायु परिवर्तन वार्ता में भाग लूंगा और महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण रखूंगा। उपयोगी बातचीत की आशा है।
यह एक ऐसी प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है।इसके तहत, प्रत्येक वित्त वर्ष में हर उस परिवार को कम से कम 100 दिनों का रोजगार प्रदान किया जाता है, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल श्रमिक कार्य करने के लिए इच्छुक होते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से सितंबर के बीच मनरेगा से 15.2 लाख श्रमिकों को हटाया गया और 98.8 लाख श्रमिकों को जोड़ा गया, जिससे कुल वृद्धि 83.6 लाख हुई।हालांकि, 14 नवंबर तक मजदूरों के हटने के बाद यह संख्या घटकर 66.50 लाख रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह प्रणाली ने एक महीने में लगभग 17 लाख शुद्ध श्रमिकों को हटा दिया।

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