चांपा/बिलासपुर। बिलासपुर के कोचिंग डिपो में ओएचई तार की करंट से झुलसे मजदूर के लिए अब आंदोलन शुरू हो गया है। रेलवे प्रशासन और ठेकेदार के हाथ खड़े करने के बाद परिजन के साथ समाज के लोगों ने बुधवार को दोबारा डीआरएमऑफिस का घेराव कर दिया।
इस दौरान धरना-प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की। साथ ही गंभीर रूप से घायल युवक के इलाज में मदद और आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने मदद नहीं मिलने पर अब उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
इस हादसे में बुरी तरह झुलसे श्रमिक परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। कल तक खुशी से परिवार चलाने वाला प्रताप बर्मन जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। अपोलो अस्पताल में वह बदहवास पड़ा है। उसकी स्थिति बेहद नाजुक है। पिछले 5 दिनों से उसका इलाज चल रहा है।
लेकिन, रेलवे प्रशासन और ठेकेदार ने अब तक प्रताप बर्मन और उसके परिवार को किसी तरह से आर्थिक सहायता नहीं दी है। इसके चलते रेलवे प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ आक्रोश भडक़ रहा है।
जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन रेलवे में ठेका श्रमिक है। वो कोचिंग डिपो में इलेक्ट्रिशियन का काम करता है। 23 अगस्त को वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के एक्स्ट्रा कोच का एसी सुधारते समय प्रताप बर्मन ओएचई तार की करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी हालत गंभीर है।
परिजन का आरोप है कि, बिजली सप्लाई बंद किए बगैर ही प्रताप को कोच के ऊपर चढ़ा दिया गया था। सुरक्षा से खिलवाड़, अफसर और ठेकेदार की लापरवाही के चलते ये हादसा हुआ। हादसे के बाद बुरी तरह से झुलसे प्रताप को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस हादसे के बाद परिजन और समाज के लोगों में रेलवे प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ आक्रोश है। वजह यह है कि अब तक घायल युवक और परिवार को कोई मदद नहीं मिली है। वहीं, घटना के बाद रेलवे प्रशासन और ठेकेदार ने जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे नाराज परिजन और समाज के लोगों ने बुधवार को ष्ठक्ररू ऑफिस का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया।
इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रताप बर्मन और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। उनकी मांग है कि घायल श्रमिक प्रताप बर्मन के इलाज का पूरा खर्च वहन किया जाए। परिवार को मुआवज़ा देने और नौकरी की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर रेलवे प्रशासन संवेदनशीलता नहीं दिखाएगा तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। साथ ही आंदोलन तेज किया जाएगा।
परिजनों का आरोप है कि, रेलवे में इलेक्ट्रिक विभाग में काम के लिए सुरक्षा के कड़े नियम है। चाहे रेलकर्मी हो या फिर ठेका श्रमिक, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी रेल प्रशासन की है। रेलवे में काम के दौरान सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन, घायल श्रमिक की जान बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। रेलवे में सीधे तौर पर श्रम कानून का उल्लंघन किया जा रहा है।
धरना-प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि, रेलवे के अधिकारी ठेकेदार को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। किसी भी ठेका कंपनी में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय की जाती है। लेकिन, रेलवे प्रशासन इस मामले में ठेकेदार के बचाव में काम कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इस हादसे के लिए जवाबदेही तय की जाए और दोषी रेल अफसरों के साथ ही ठेका कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए।