डोंगिया सुलोनी में संत असंग देव की अमृतवाणी से बहेगी सत्संग की दिव्य धारा

सक्ती। सक्ती जिले के ग्राम डोंगिया सुलोनी में आगामी 10 से 12 फरवरी तक सुखद सत्संग अमृत कथा का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय आयोजन में राष्ट्रीय संत असंग देव जी महाराज अपने मुखारविंद से अमृतवाणी की वर्षा कर श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का मार्ग दिखाएंगे।
संत असंग देव जी के ग्राम डोंगिया सुलोनी आगमन पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामकुमार गबेल ने गीता गबेल के साथ मिलकर उनका आत्मीय, गरिमामय एवं जोरदार स्वागत किया। इस आयोजन की संपूर्ण परिकल्पना, व्यवस्था एवं सफल संचालन में गबेल परिवार की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही है।रामकुमार गबेल एवं गीता गबेल ने जानकारी देते हुए बताया कि पूर्वजों के आशीर्वाद और पूज्य गुरुदेव संत श्री असंग देव जी के पावन सानिध्य में यह आयोजन क्षेत्रवासियों के लिए सौभाग्य का विषय है। आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों से सपरिवार सत्संग में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
सत्संग के साथ सेवा भी—भंडारे की विशेष व्यवस्था
गबेल परिवार द्वारा बताया गया कि कथा उपरांत प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से सभी भक्तजनों के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही इस अवसर पर गबेल समाज के समाजसेवा में उत्कृष्ट योगदान एवं कबीर पंथ में निष्ठावान सेवा भाव रखने वाले सेवाभावियों का सम्मान भी किया जाएगा।
समाज सुधार की दिशा में संत असंग देव का प्रभावी योगदान
संत असंग देव जी केवल प्रवचन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके आश्रमों के माध्यम से नशामुक्ति अभियान, समाज सेवा और मानव कल्याण के अनेक कार्य संचालित हो रहे हैं। हजारों परिवारों को व्यसन की गिरफ्त से बाहर निकालकर उन्होंने समाज को नई दिशा दी है। एक व्यसन मुक्त समाज ही राष्ट्र की सच्ची उन्नति का आधार है। सादगी, शुद्ध आचरण और सही जीवन जीने की कला संत असंग देव जी महाराज अपनी सरल वाणी, तार्किक विचार और कबीर पंथी दर्शन के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उनके सत्संगों में उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज का मानव मानसिक शांति और आत्मिक संतोष की तलाश में है।वे अपने प्रवचनों में नशामुक्ति, शाकाहार और शुद्ध विचारों पर विशेष जोर देते हैं।
उनका प्रेरक संदेश है—
जब तक खान-पान शुद्ध नहीं होगा, तब तक विचार भी शुद्ध नहीं हो सकते।
औरभाग्य से ज्यादा और समय से पहले कुछ नहीं मिलता, लेकिन पुरुषार्थ करना मनुष्य का कर्तव्य है।डोंगिया सुलोनी बनेगा आध्यात्मिक चेतना का केंद्रयह सत्संग आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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